ईरानोफ़ोबिया, ईरान में मानवाधिकार के उल्लंघन के दावे का लक्ष्य
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ईरानोफ़ोबिया, ईरान में मानवाधिकार के उल्लंघन के दावे का लक्ष्य
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १३, २०१७ १३:४६ Asia/Kolkata

ईरानोफ़ोबिया, ईरान में मानवाधिकार के उल्लंघन के दावे का लक्ष्य

ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी सत्ताइसवीं सालाना रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें दुनिया में 90 देशों में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा की है। इस रिपोर्ट में ईरान के बारे में भी कुछ दावे किए गए हैं। जैसे नागरिक व राजनैतिक अधिकार का पालन न होना, मौत की सज़ा और ख़ास तौर पर मादक पदार्थ की तस्करी के अपराधियों को फांसी की बढ़ती संख्या और दोहरी नागरिकता वाले लोगों पर पश्चिम के लिए जासूसी के आरोप का इस कथित रिपोर्ट में उल्लेख है।

संयुक्त राष्ट्र संघ और पश्चिम से जुड़ी दूसरी मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्टों को वर्षों हो चुका है मानवाधिकार की सच्चाई का सामना किए हुए। इन रिपोर्टों में, मानवाधिकार के समर्थन का दावा करने वालों की ओर से मानवाधिकार का वास्तव में हनन करने वालों को मिल रहे समर्थन का, कोई उल्लेख नहीं होता। इसका कारण यह है कि पश्चिम की नज़र में मानवाधिकार की अलग परिभाषा है। पश्चिमी देशों की नज़र में मानवाधिकार भी उसी तरह अच्छे और बुरे में विभाजित है जिस तरह पश्चिमी देशों ने आतंकवाद को अच्छे और बुरे में विभाजित किया है। इस वर्गीकरण के तहत वे देश पश्चिम की नज़र में अच्छे हैं जो उनके हितों की पूर्ति करते हैं और जो देश पश्चिम की वर्चस्ववादी व अतिक्रमणकारी नीतियों के ख़िलाफ़ डट जाते हैं और मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़ी उनकी नीतियों को चुनौती देते हैं, उन्हें बुरे देशों की सूचि में रखा जाता है।

मिसाल के तौर पर सऊदी अरब पश्चिम की नज़र में मानवाधिकार का उल्लंघनकर्ता देश नहीं है इसलिए कि वह पश्चिम के हितों की पूर्ति करता है। दूसरी मिसाल ज़ायोनी शासन है जो पश्चिमी देशों की नज़र में मानवाधिकार का उल्लंघनकर्ता नहीं है, चाहे वह जितने फ़िलिस्तीनियों का जनसंहार करे और वर्षों से ग़ज़्ज़ा की नाकाबंदी जारी रखे। दूसरी ओर फ़िलिस्तीनियों को, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र के अनुसार अतिग्रहणकारी के मुक़ाबले में अपनी रक्षा का अधिकार हासिल है, आतंकी कहा जाता है। अभी भी विश्व जनमत ईरान पर सद्दाम शासन द्वारा थोपी गयी जंग के दौरान फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी बेडे वेन्सेन्स से ईरानी यात्री विमान पर हुए मीज़ाईल से हमले को भूला नहीं है।

सच बात यह है कि आज के दौर में मानवाधिकार का वास्तविक रूप पश्चिम के राजनैतिक लक्ष्य की भेंट चढ़ा हुआ है और मानवाधिकार की रक्षक संस्थाएं भी इन्हीं लक्ष्यों के लिए काम कर रही हैं। (MAQ/T)