संयुक्त अरब इमारात में ईरान के प्रभारी राजदूत को तलब किया गया
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यमन की त्यागपत्र दे चुकी सरकार और उसके घटक बारमबार ईरान पर हूसी संघर्षकर्ताओं के समर्थन का आरोप लगा चुके हैं। तेहरान ने हमेशा इन निराधारा आरोपों का खंडन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०३, २०१७ १०:३३ Asia/Kolkata
  • संयुक्त अरब इमारात में ईरान के प्रभारी राजदूत को तलब किया गया

यमन की त्यागपत्र दे चुकी सरकार और उसके घटक बारमबार ईरान पर हूसी संघर्षकर्ताओं के समर्थन का आरोप लगा चुके हैं। तेहरान ने हमेशा इन निराधारा आरोपों का खंडन किया है।

संयुक्त अरब इमारात के विदेशमंत्रालय में इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रभारी राजदूत को तलब किया गया। साथ ही संयुक्त अरब इमारात ने तेहरान पर यमन के हूसी संघर्षकर्ताओं के लिए हथियार भेजने का आरोप भी लगाया है।

संयुक्त अरब इमारात की सरकारी न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इस देश के विदेशमंत्रालय ने ईरान के प्रभारी राजदूत को एक आपत्तिजनक ज्ञापन भी दिया है जिसमें कहा गया है कि ईरान ग़ैर कानूनी रूप से यमन के हूसी संघर्षकर्ताओं को हथियारों से लैस करता है।

इसी प्रकार संयुक्त अरब इमारात के ज्ञापन में आया है कि ईरानी हथियारों में ड्रोन भी है जिसे अभी हाल ही में सऊदी अरब के नेतृत्व में बने अरब गठबंधन के हमलों में निशाना बनाया गया जो सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है।

संयुक्त अरब इमारात के एक अधिकारी ने इसी सप्ताह दावा किया था कि इस देश के सैनिकों ने यमन के पश्चिमी तट पर हूसियों के एक ड्रोन को नष्ट कर दिया था।

इसी प्रकार संयुक्त अरब इमारात के इस अधिकारी ने दावा किया था कि यह ड्रोन उन हथियारों में से है जो ईरान से यमनी बलों तक पहुंचे हैं। ईरान ने अभी तक इस दावे के संबंध में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।

ज्ञात रहे कि यमन पर हमला करने में संयुक्त अरब इमारात सऊदी अरब का एक घटक व पिछलग्गू देश है और हालिया वर्षों में वह ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है और ईरान तथा सऊदी अरब के कूटनयिक संबंधों के टूट जाने के बाद उसने ईरान पर राजनीतिक दबाव डालने के लक्ष्य से तेहरान के साथ अपने कूटनयिक संबंधों की सतह को कम कर दिया है।

यमन की त्यागपत्र दे चुकी सरकार और उसके घटक बारमबार ईरान पर हूसी संघर्षकर्ताओं के समर्थन का आरोप लगा चुके हैं। तेहरान ने हमेशा इन निराधारा आरोपों का खंडन किया है।

ज्ञात रहे कि 26 मार्च वर्ष 2015 से सऊदी अरब और उसकी अगुवाई में बने गठबंधन ने यमन पर हमला आरंभ किया है जिसमें अब तक 11 हज़ार 400 से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं। मरने वालों में अधिकांश आम नागरिक थे। MM