दुनिया की सातवीं सैनिक ताक़त है ईरान
तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति ने ईरानी जनता और व्यवस्था के विरुद्ध दुशमनों की सभी साज़िशों को नाकाम बना दिया।
तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने यूरोपीय मामलों के अधिकारी के इस बयान पर कि यदि परमाणु समझौता न हुआ होता तो ईरान के विरुद्ध युद्ध छिड़ जाना निश्चित था, कहा कि यह बयान एक धोखा है क्योंकि दुनिया के पास ईरान से लड़ने की ताक़त नहीं है और ईरानी जनता आख़िर तक दुशमनों के मुक़ाबले में डटी रहेगी।
हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहा कि यदि अमरीका और बड़ी साम्राज्यवादी शक्तियां ईरान पर हमला नहीं कर रही हैं तो इसका कारण ईरान की सैनक शक्ति और जनता की ताक़त है। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान दुनिया की सातवीं सैनिक ताक़त है।
तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने दुशमनों के आर्थिक और सांस्कृतिक हमलों के मुक़ाबले में भी होशियार रहने की ज़रूरत पर बल देते हुए कहा कि प्रतिरोधक अर्थ व्यवस्था के संपूर्ण ढंग से लागू हो जाने की स्थिति में यह साज़िश भी विफल हो जाएगी।
हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने बहरैन में जनता पर आले ख़लीफ़ा शासन के अत्याचारों की निंदा करते हुए कहा कि बहरैन की जनता की क्रान्ति समाप्त होने वाली नहीं है और यह आंदोलन विदेशियों की पिटठू सरकार के मुक़ाबले में निश्चित रूप से विजयी होगा। उन्होंने कहा कि बहरैन की जनता स्वाधीनता और निर्वाचित सरकार चाहती।
तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने बच्चों का जनसंहार करने वाली आले सऊद सरकार की भी निंदा की और कहा कि यह सरकार अपने अंतर्राष्ट्रीय समर्थकों के साथ मिलकर यमन की जनता के खिलाफ़ लगातार आपराधिक कार्यवाहिंया कर रही है।
हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने आले सऊद के अपराधों पर मौन धारण करने पर संयुक्त राष्ट्र संघ की भी आलोचना की और कहा कि इस संस्था को चाहिए कि इन अपराधों पर रोक लगाए।
तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने इस्लामी क्रान्ति की वर्षगांठ के जुलूसो में ईरानी जनता की भरपूर भागीदारी का आभार व्यक्ति किया और कहा कि यह भागीदारी दुशमनों के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा थी।