आईआरजीसी को ब्लैक लिस्ट करना ख़तरनाक हैः हफ़िग्टन पोस्ट
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हफ़िग्टन पोस्ट ने अमरीका की आतंकियों की लिस्ट में ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी को शामिल करने को चार कारणों से ख़तरनाक तथा क्षेत्र की शांति और स्थिरता में विघ्न उत्पन्न करने वाला क़दम बताया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb १८, २०१७ ०९:१९ Asia/Kolkata
  • आईआरजीसी को ब्लैक लिस्ट करना ख़तरनाक हैः हफ़िग्टन पोस्ट

हफ़िग्टन पोस्ट ने अमरीका की आतंकियों की लिस्ट में ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी को शामिल करने को चार कारणों से ख़तरनाक तथा क्षेत्र की शांति और स्थिरता में विघ्न उत्पन्न करने वाला क़दम बताया है।

पुष्ट रिपोर्टों से पता चलता है कि ट्रम्प प्रशासन आईआरजीसी को ब्लैक लिस्ट करने वाला है। स्वयं अमरीका की सुरक्षा और सैन्य संस्थाओं ने इस संबंध में वाइट हाऊस को सचेत भी किया है। सच्चाई यह है कि आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड और अमरीका की सेन्ट्रल कमान तीन दशकों से भीषण चुनौतियों का सामना कर रही है। दोनों ही सेना ने 80 के दशक के आरंभ में ईरान पर इराक़ द्वारा थोपे गये युद्ध के बाद, सीमा के बाहर अपनी गतिविधियां आरंभ की।

सेन्टाकाम की ज़िम्मेदारी, मध्यपूर्व, पूर्वी अफ़्रीक़ा और मध्य एशिया में अमरीकी सेना का कमान्ड संभालना है। यह भौगोलिक क्षेत्र, ईरान और उसके पड़ोसी देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा को तुरंत प्रभावित कर देते हैं, इसीलिए ईरान की क़ुद्स ब्रिगेड ने इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया। अमरीका और ईरान दोनों ही विदेशों में एक दूसरे की सैन्य गतिविधियों को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हैं और दोनों ही भय पैदा करने और अपना वर्चस्व जमाने का एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं किन्तु सच्चाई यह है कि अमरीका और ईरान ही नहीं बल्कि दुनिया की बहुत सी सेनाएं विदेशों में गतिविधियां अंजाम देती हैं जैसे बहरैन में सऊदी अरब की सैन्य उपस्थिति, इराक़ और सीरिया में तुर्क सैनिकों का अभियान, यमन पर सऊदी अरब के हमले और सीरिया में रूस की सैन्य उपस्थिति इत्यादि।

अमरीका की आतंकवादियों की लिस्ट में आईआरजीसी को शामिल करने के तीन ख़तरनाक परिणामों का उल्लेख किया जा रहा है।

पहलाः सेन्टाकाम और क़ुद्स ब्रिगेड, सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, लेबनान और फ़ार्स की खाड़ी में सबसे शक्तिशाली और सबसे प्रभावी सेना है। यहां तक कि यमन में भी अमरीका और सऊदी अरब, क़ुद्स ब्रिगेड को अपने लिए सबसे बड़ी रुकावट समझते हैं। इसीलिए यह स्पष्ट है कि आईआरजीस के साथ सहयोग, क्षेत्र के समस्त संकटों के समाधान का अटूट भाग होगा। आईआरजीसी को आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल करने से संकट के हल के लिए समस्त कूटनयिक रास्ते बंद हो जाएंगे।

दूसराः आईआरजीसी ईरान की सशस्त्र सेना का अटूट भाग है इसीलिए इसको आतंकवादियों की लिस्ट में डालने से ईरान भी सामने वाले पक्ष की विशेष सेना को आतंकवादी समझने लगेगा और इसका अर्थ ईरान और अमरीका में अनाधिकारिक युद्ध छिड़ना होगा और कम से कम इसका यह परिणाम निकलेगा कि क्षेत्र के संकटों के बारे में दोनों देशों का हर प्रकार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग समाप्त हो जाएगा।

तीसराः अमरीका के नये राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा कि आतंकवादी गुट दाइश की समाप्ति और इस गुट को जड़ से उखाड़ फेंकना, उनकी सरकार का एजेन्डा है। ईरान की सेना इराक़, सीरिया और क्षेत्र में दाइश से संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में है और सीरिया में दाइश से संघर्ष में रूस की प्रगति और हलब की स्वतंत्रता ईरान के सहयोग के बिना असंभव थी।  कुर्द अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि यदि ईरान न होता तो इराक़ी कुर्दिस्तान की राजधानी अरबील पर दाइश का नियंत्रण होता। वर्तमान समय में ईरान की सशस्त्र सेना दाइश के चंगुल से मूसिल की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ईरान और अमरीका के मध्य सैन्य टकराव से दाइश के विरुद्ध संघर्ष की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। (AK)