फ़िलिस्तीन, ईरान व इस्लामी जगत की पहली प्राथमकिता
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तेहरान के इमामे जुमा ने कहा है कि फ़िलिस्तीन का विषय, इस्लामी गणतंत्र ईरान की विदेश नीति में सबसे ऊपर है और यह इस्लामी जगत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २४, २०१७ १२:२४ Asia/Kolkata
  • फ़िलिस्तीन, ईरान व इस्लामी जगत की पहली प्राथमकिता

तेहरान के इमामे जुमा ने कहा है कि फ़िलिस्तीन का विषय, इस्लामी गणतंत्र ईरान की विदेश नीति में सबसे ऊपर है और यह इस्लामी जगत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

आयतुल्लाह मुहम्मद अली मुवह्हेदी किरमानी ने तेहरान की नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में तेहरान में फ़िलिस्तीनी इन्तेफ़ाज़ा के समर्थन में छठी अंतर्राष्ट्रीय कान्फ़्रेंस के आयोजन की ओर संकेत करते हुए कहा कि मुसलमानों और इस्लामी क्षेत्रों पर काफ़िरों का वर्चस्व वैध नहीं है और फ़िलिस्तीनी जनता का समर्थन और इस्राईल की ओर से उनके क्षेत्रों पर क़ब्ज़े का विरोध, ईरान की नीतियों में सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रीय हित क्षेत्र में फ़िलिस्तीन के विषय से जुड़े हुए हैं और फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी शासन के अपराधों, उनके जनसंहार और उन्हें बेघर करने की कार्यवाहियों को कभी भुलाया नहीं जाएगा।

 

तेहरान के अस्थाई इमामे जुमा ने फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इस्राईल के अवैध शासन की स्थापना की ओर संकेत करते हुए कहा कि ब्रिटेन ने एक अवैध समूह को पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से यहूदी-ज़ायोनी सरकार के गठन की योजना पेश की ओर फिर अमरीका व अन्य पश्चिमी देशों ने उस योजना का समर्थन किया। आयतुल्लाह मुवह्हेदी किरमानी ने कहा कि मध्यपूर्व के संवेदनशील क्षेत्र में अवैध ज़ायोनी शासन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य, क्षेत्र के मुस्लिम देशों व सरकारों को कमज़ोर करना था और अमरीका व ब्रिटेन ने कुछ अन्य पश्चिमी देशों की मदद से क्षेत्र के प्राकृतिक और तेल व ऊर्जा स्रोतों पर क़ब्ज़े के लिए ज़ायोनी शासन को एक नासूर की तरह मध्यपूर्व के इस्लामी देशों के बीच अस्तित्व प्रदान कर दिया। उन्होंने इसी के साथ कहा कि कुछ पश्चिमी और क्षेत्र के अरब देशों के दबाव के बावजूद फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता गुट, ज़ायोनियों के अवैध क़ब्ज़े के मुक़ाबले में डटे हुए हैं और जल्द ही यह अतिग्रहणकारी सरकार और उसके समर्थक इस्लामी प्रतिरोधकर्ताओं के सामने घुटने टेकने पर विवश हो जाएंगे। (HN)