मानवाधिकार के मामलों को राजनीति से दूर रखना ज़रूरी
ईरान ने कहा है कि मानवाधिकार के मामलों के राजनीतिकरण से परहेज़ बहुत ज़रूरी है।
मंगलवार को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार परिषद की बैठक में ईरान के विदेश उपमंत्री अब्बास इराक़ची ने मानवाधिकार के मुद्दे को कुछ देशों द्वारा हथकंडे के रूप में प्रयोग किए जाने की आलोचना की और कहा कि मानवाधिकार परिषद को चाहिए कि दुनिया में मानवाधिकार की स्थिति में सुधार के लिए सार्थक बातचीत से सहयोग का उचित मिकैनिज़म तैयार करे और ख़ुद को आरोप प्रत्यारोप का अखाड़ा बनने से बचाए।
अब्बास इराक़ची ने ईरान के प्राचीन सांस्कृतिक व इस्लामी अतीत का हवाला देते हुए कहा कि ईरान ने हमेशा मानवाधिकार की स्थिति की सुधार को प्राथमिकता दी है और इस संदर्भ में बुनियादी क़दम उठाए हैं।
विदेश उपमंत्री अब्बास इराक़ची ने कहा कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विभाग के साथ हमेशा सहयोग किया है अतः ईरान में मानवाधिकार की स्थिति की आलोचना में मानवाधिकार परिषद में प्रस्ताव पारित किया जाना निराधार और अस्वीकार्य है।
अब्बास इराक़ची ने यमन में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के हनन का हवाला देते हुए कहा कि विश्व समुदाय को यमन में निर्दोषों विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों पर होने वाली बमबारी का मूक दर्शक नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यमन में हमलावर सेनाओं द्वारा अस्पतालों, मस्जिदों, घरों यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित इमारतों के ध्वस्त किए जाने को युद्ध अपराध माना जाए उन्होंने विश्व समुदाय से मांग की कि यमन की जनता के जनसंहार को तत्काल बंद करवाया जाए और इन अपराधों में लिप्त देशों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए।
विदेश उपमंत्री अब्बास इराक़ची ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि फ़िलिस्तीन में मानवाधिकारों का हनन और योजनाबद्ध रूप से इस्राईल द्वारा फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों पर हमला तत्काल रुकना चाहिए।