राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी आतंकवादियों के समर्थक हैः रहीम सफवी
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पहली बार अमेरिका ने सीधे रूप से सीरिया की अश्शइरात हवाई छावनी पर 59 कूज़ मिसाइलों से हमला किया था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr १०, २०१७ ०७:०४ Asia/Kolkata
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी आतंकवादियों के समर्थक हैः रहीम सफवी

पहली बार अमेरिका ने सीधे रूप से सीरिया की अश्शइरात हवाई छावनी पर 59 कूज़ मिसाइलों से हमला किया था।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सैयद यहिया रहीम सफवी ने रविवार को कहा कि सीरिया पर अमेरिकी हमले ने दर्शा दिया कि अमेरिका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस देश के पहले वाले राष्ट्रपतियों की भांति आतंकवादियों के समर्थक हैं। साथ ही उन्होंने सीरिया पर अमेरिका के मिज़ाइली हमले की भर्त्सना की।

गत शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ताकाल में पहली बार अमेरिका ने सीधे रूप से सीरिया की अश्शइरात हवाई छावनी पर 59 कूज़ मिसाइलों से हमला किया था।  अमेरिका के इस हमले में मारे जाने वालों में चार बच्चे भी शामिल हैं। अमेरिका ने यह हमला सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना किया है।

उसने यह हमला भूमध्य सागर में स्थित अपने युद्धपोतों से किया। इस हमले का औचित्य दर्शाते हुए उसने दावा किया है कि सीरिया के एदलिब प्रांत के खान शैखून क्षेत्र में रासायनिक हथियारों की प्रतिक्रिया में उसने यह हमला किया है।

हालिया दिनों में पश्चिमी और अरब देशों ने आतंकवादियों को मुक्ति दिलानों के लिए अपने प्रयासों में वृद्धि कर दी है और उनका दावा है कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया है जबकि दमिश्क सरकार ने इस आरोप का कड़ाई से खंडन किया है।

ज्ञात रहे कि इराक और सीरिया में आतंकवादी गुटों ने इन देशों की जनता के विरुद्ध बारमबार रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया है और खान शैखून क्षेत्र में जो रासायनिक हमला किया गया है उसमें 100 से अधिक लोग हताहत और लगभग 400 घायल हुए हैं।

बहुत से टीकाकारों का मानना है कि रासायनिक हथियारों के प्रयोग का आरोप सीरिया की सरकार पर लगाने का उद्देश्य वास्तविकताओं को उल्टा दिखाने और हालिया दिनों में आतंकवादियों के मुकाबले में सीरिया सेना को मिलने वाली सफलताओं से जनमत का ध्यान भटकाना है।

सीरिया संकट वर्ष 2011 में आतंकवादी गुटों के व्यापक हमले से आरंभ हुआ था और इन आतंकवादी गुटों को सऊदी अरब, अमेरिका और उसके घटकों का व्यापक समर्थन प्राप्त था और उसका मूल लक्ष्य सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद की कानूनी सरकार का तख्ता पलटना था। MM