कुछ देशों की सेनाएं आतंकवाद और विद्रोह की समर्थक हैंः रूहानी
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राष्ट्रपति रूहानी ने कहा है कि संसार के कुछ देशों की सेनाओं का नाम अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप, जातीय सफ़ाए, आतंकवाद के समर्थन, विद्रोह, राष्ट्रों के विचारों व क़ानून की अनदेखी की याद दिलाता है लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान की सेना को हमेशा अच्छे नाम से याद किया जाता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr १८, २०१७ ०७:१० Asia/Kolkata
  • कुछ देशों की सेनाएं आतंकवाद और विद्रोह की समर्थक हैंः रूहानी

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा है कि संसार के कुछ देशों की सेनाओं का नाम अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप, जातीय सफ़ाए, आतंकवाद के समर्थन, विद्रोह, राष्ट्रों के विचारों व क़ानून की अनदेखी की याद दिलाता है लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान की सेना को हमेशा अच्छे नाम से याद किया जाता है।

डाॅक्टर हसन रूहानी ने मंगलवार को सेना दिवस के उपलक्ष्य में तेहरान में इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के मज़ार के निकट आयोजित होने समारोह में इस दिन की बधाई पेश करते हुए कहा कि ईरान की सेना, अनुशासन, ईमान और क़ानून व राष्ट्रीय हितों के परिप्रेक्ष्य में देश की क़ानूनी प्रतिरक्षा की याद दिलाती है।  उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा ही टकराव और तनाव से दूर रहने का इच्छुक रहा है लेकिन इसी के साथ वह षड्यंत्रों की ओर से भी सजग है और अपनी प्रतिरक्षा क्षमता में निरंतर वृद्धि कर रहा है।

 

ईरान के राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि ईरानी सेना, आक्रमणकारी नहीं है लेकिन इसी के साथ उसने यह भी दिखा दिया है कि वह अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में कितनी कठोर है और पूरी दृढ़ता के साथ देश की रक्षा करती है। डाॅक्टर रूहानी ने बल देकर कहा कि ईरान की सेना में ईमान, ईश्वर के प्रति समर्पण, साहस, बलिदान और त्याग जैसी भावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं और कम ही देशों में इस प्रकार की विशेषताएं मौजूद हैं और कोई भी शक्ति व संभावना ईरान की सेना के ईमान, समर्पण और ताक़त का स्थान नहीं ले सकती। (HN)