ईरानी सेना ने अपनी शक्ति की दिखाई एक झलक
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ईरानी सेना अतिक्रमणकारी शत्रुओं का मुहतोड़ जवाब देने में लेशमात्र भी संकोच से काम नहीं लेगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr १८, २०१७ १५:४९ Asia/Kolkata

ईरानी सेना अतिक्रमणकारी शत्रुओं का मुहतोड़ जवाब देने में लेशमात्र भी संकोच से काम नहीं लेगी।

 

18 अप्रैल को ईरान में सेना दिवस मनाया जाता है। ईरानी सेना ने इस अवसर पर अपनी क्षमता के एक भाग का प्रदर्शन किया ताकि क्षेत्रीय जनता को यह संदेश जाये कि ईरान की सशस्त्र सेना क्षेत्र की शांति व सुरक्षा में पूरी तरह सक्षम है।

ईरानी सेना ने इस देश पर इराक द्वारा थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध के दौरान दुश्मनों के मुकाबले में पूरी शक्ति व साहस का प्रदर्शन किया और अतिक्रमणकारी शत्रुओं का मुहतोड़ जवाब देने में वह लेशमात्र भी संकोच से काम नहीं लेगी।

ईरानी सेना इस देश पर इराकी सेना द्वारा थोपे गये थोपे गये युद्ध के अनुभवों और रक्षा के क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं से लाभ उठाकर पूरी शक्ति के साथ दुश्मनों का करारा जवाब देने के लिए तैयार है यहां तक कि वह प्रतिरोधक शक्ति के रूप में दुश्मनों को ईरान की सीमाओं के बाहर ही तबाह करने की क्षमता रखती है।

इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध की समाप्ति के बाद जल, थल और वायु के क्षेत्र में ईरानी सेना ने ध्यान योग्य सफलता अर्जित की है इस प्रकार से कि वर्तमान समय  में ईरान ने आधुनिकतम बैलेस्टिक मिसाइल का निर्माण कर लिया है इस प्रकार से कि इस मिज़ाइल की तकनीक विश्व के कुछ ही देशों के पास है।

इसी प्रकार ईरान ने युद्धपोत विरोधी क्रूज़ मिज़ाइल नसीर, हवा से हवा में मार करने वाले “फकूर” मिज़ाइल और निगरानी व सूचनाएं एकत्रित करने वाले “मुहाजिर-6” ड्रोन का निर्माण कर लिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने सेना दिवस के अवसर पर युद्धक विमान “काहिर 313” को उड़ान भरने के लिए तैयार करने का आदेश भी दिया है।

इसी प्रकार ईरान की सशस्त्र सेना ने सबा 248 हेलीकाप्टर और कर्रार नामक टैंक भी बना लिया है और इनके निर्माण में पूरी स्थानीय तकनीक का प्रयोग किया गया है

वास्तविकता यह है कि क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों और क्षेत्र में अमेरिका और नैटो की गतिविधियों के दृष्टिगत हर प्रकार की संभावित धमकी व चुनौती के मुकाबले में हर स्तर पर सैनिक तत्परता को समय की आवश्यकता समझना चाहिये और ईरान शत्रुओं के अतिक्रमण का लक्ष्य रह चुका है

इसलिए उसे स्वयं को प्रचलित हथियारों से लैस करना चाहिये ताकि दुश्मनों में ईरान को धमकी देने का भी साहस पैदा न हो सके और उसके अंदर यह भावना पैदा हो जाये कि ईरान पर हमला करने का अर्थ स्वयं को नाश करना है। MM