आतंकवाद किसी भी धर्म से विशेष नहीं हैः विदेशमंत्री
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आतंकवाद और अतिवाद विश्व समुदाय की अनुपयोगिता का परिणाम है
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २३, २०१७ १६:३२ Asia/Kolkata

आतंकवाद और अतिवाद विश्व समुदाय की अनुपयोगिता का परिणाम है

ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ का एक लेख कुवैत के अर्राय समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने लिखा है कि आतंकवाद और अतिवाद से मुकाबले का एकमात्र प्रभावी मार्ग इस समस्या के समाधान के लिए विश्व समुदाय का संयुक्त व सही निष्कर्ष पर पहुंच जाना है।

विदेशमंत्री ने विश्व स्तर पर आतंकवाद के फैलने के कारण को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि आतंकवाद और अतिवाद विश्व समुदाय की अनुपयोगिता का परिणाम है और यह दोनों समस्या न तो विश्व के किसी निश्चित क्षेत्र से विशेष है और न ही किसी धर्म से विशेष है।

आतंकवाद विभिन्न रूपों में है और कोई भी धर्म उसकी पुष्टि नहीं करता है और हर धर्म और उसके मानने वाले अतिवाद और आतंकवाद की भर्त्सना करते हैं। विश्व में कोई भी धर्म दूसरे धर्मों के अनुयाइयों व मानने वालों की हत्या के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है और समस्त धर्म विशेषकर इस्लाम शांतिपूर्ण ढंग से दूसरों के साथ रहने की शिक्षा देता है।

इस्लाम सहित दूसरे धर्मों में विभिन्न गुटों का होना इस बात का कारण बना है कि इस्लाम के शत्रु इस्लाम धर्म के मानने वालों के मध्य फूट का बीज बोयें और उन्हें एक दूसरे के आमने- सामने ला खड़ा करने का प्रयास करें। इसी बात के दृष्टिगत आतंकवादी गुट विभिन्न नामों से एशिया, केन्द्रीय एशिया और उत्तरी अफ्रीका में अस्तित्व में आ गये हैं।

इस प्रकार की परिस्थिति में आतंकवाद के संबंध में पश्चिम की एक स्पष्ट नीति नहीं है और आतंकवाद की एक परिभाषा नहीं है जो विश्व स्तर पर आतंकवाद और अतिवाद के फैलने का कारण बनी है। आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में देशों की नीतियों से संयुक्त राष्ट्रसंघ का प्रभावित हो जाना विश्व स्तर पर आतंकवाद के फैलने का कारण बना है। पश्चिम आतंकवाद का प्रयोग एक हथकंडे के रूप में कर रहा है और इसी वजह से विश्व समुदाय आतंकवाद से मुकाबला नहीं कर पा रहा है।

पश्चिम आतंकवाद का प्रयोग हथकंडे के रूप में ऐसी स्थिति में कर रहा है जब आतंकवाद के अभिशाप ने समस्त मानवता को अपनी चपेट में ले लिया है यहां तक कि पश्चिम और यूरोप को भी। बहरहाल अगर गम्भीरता से और किसी भेदभाव के बिना आतंकवाद से मुकाबला नहीं किया गया तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और विषम रूप धारण कर लेगा और इससे निपटना बहुत कठिन हो जायेगा। MM