सऊदी अरब, क्षेत्र में हिंसा फैलाने का ज़िम्मेदार
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री के हालिया बयान को राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के चौथे अनुच्छेद के आधार पर ईरान के संबंध में धमकी और ईरान के भीतर आतंकी व हिंसक कार्यवाहियों में सऊदी सरकार के सहयोग की स्वीकारोक्ति बताया है।
ग़ुलाम अली ख़ुशरू ने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव और सुरक्षा परिषद के प्रमुख को एक पत्र लिख कर विश्व समुदाय से मांग की है कि वह क्षेत्र और संसार में आतंकवाद और चरमपंथ का समर्थन बंद करने और यमन पर हमला और आम लोगों का जनसंहार बंद करने के लिए सऊदी अरब के ख़िलाफ़ ज़रूरी कार्यवाही करे। सऊदी अरब के विदेश मंत्री और इस देश के युवराज के उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन सलमान ने मंगलवार को एक सऊदी टीवी से बात करते हुए दावा किया था कि ईरान, क्षेत्र में अपनी विशेष नीतियों को आगे बढ़ा रहा है और धार्मिक विचारधारा के अनुसार काम कर रहा है अतः उसके साथ सऊदी अरब का मेल संभव नहीं है। मुहम्मद बिन सलमान का यह शत्रुतापूर्ण बयान, जो अमरीका के उनके हालिया दौरे के बाद सामने आया है, यह दर्शाता है कि सऊदी अरब राजनैतिक व आर्थिक संकटों से मुक्ति के लिए ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की शत्रुतापूर्ण नीतियों के अनुसार ही काम कर रहा है।
सऊदी अरब यह समझता है कि ईरान के साथ टकराव की स्थिति में ही उसका राजनैतिक जीवन जारी रह सकता है क्योंकि ईरान की सार्थक व तर्कसंगत नीतियों का क्षेत्र और संसार के देशों ने स्वागत किया है। ईरान को एक सांप्रदायिक नीतियों वाला देश दर्शाने की सऊदी अरब की कोशिशें कभी भी सफल नहीं हो पाएंगी क्योंकि ईरान, एकता की नीति अपना कर सीरिया व इराक़ में अरबों के साथ मिल कर उस आतंकवाद से संघर्ष कर रहा है जिसे जन्म देने वालों में सऊदी अरब सबसे आगे है। इस्लामी गणतंत्र ईरान के लिए जो बात महत्व रखती है वह यह है कि पश्चिम एशिया के संवेदनशील क्षेत्र के अनेक संकटों से बाहर निकलने के लिए इस्लामी जगत के बीच एकता व क्षेत्रीय देशों के बीच समरसता पैदा हो। पश्चिम एशिया के संकटों का मुख्य कारण बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप और चरमपंथी व तकफ़ीरी आतंकवादी विचारों का फलना-फूलना है। इन विचारों का पोषण मुख्य रूप से सऊदी अरब में सांप्रदायिक वहाबियों की ओर से किया जा रहा है। (HN)