सिल्क रोड के पुर्नजीवित करने में ईरान की भूमिका
चीन की राजधानी बीजिंग में रविवार को दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कांफ़्रेस आरंभ हुई।
बेल्ट एंड रोफ फोरम नामक इस सम्मेलन में विश्व के 130 देशों के सैकड़ों लोग भाग ले रहे हैं। बीजिंग में आरंभ हुई यह कांफ़्रेंस 15 जून तक जारी रहेगी। इस बैठक में ईरान के वित्तमंत्री अली तैयबनिया ने भी भाग लिया। ईरान के वित्तमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति की उस योजना का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने सिल्क रोड के पुनर्जीवित किये जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इससे एेतिहासिक सिल्क रोड के किनारे बसे देशों के बीच अधिक से अधिक सहयोग में वृद्धि होगी।
सिल्क रोड के पुर्नजीवित करने में ईरान प्रमुख भमिका निभा सकता है। पिछले साल क़ज़वीन नगर में उन देशों के महापौरों की 16वीं बैठक हुई थी जो सिल्क रोड के किनारे बसे हैं। सिल्करोड एक एेसी लंबी सड़क है जो 1700 वर्षों से अधिक समय तक विश्व के व्यापारिकों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण राजमार्ग रहा है। सिल्क रोड, एशिया का एेसा एकमात्र राजमार्ग था जो पश्चिम, पूर्वी तथा दक्षिणी एशिया को मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीका से जोड़ता है। इस एेतिहासिक राजमार्ग के माध्यम से जहां पर वस्तुओं को एक देश से दूसरे देश पहुंचाते थे वहीं पर इस मार्ग के माध्यम से बहुत सी संस्कृतियों के भी दर्शन होते थे। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सिल्क रोड के माध्यम से विश्व के कई देशों के बीच एकता और समरस्ता पैदा की जा सकती है।
सिल्क रोड जैसे महत्वपूर्ण एेतिहासिक मार्ग पर ईरान की चाबहार बंदरगाह, एक चौराहे की भांति है जो जलमार्ग और सूखे रास्तों को एक दूसरे से जोड़ती है। ईरान के लोग सिल्क रोड के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान, भारत, चीन और कई देशों की यात्राएं करते आए हैं। एसे में यह कहा जा सकता है कि सिल्क रोड जैसे महत्वपूर्ण एेतिहासिक मार्ग को पुनर्जीवित करने से वास्तव में ईरानी संस्कृति और अन्य संस्कृतियों का पुनः मिलन हो सकता है।