ईरानोफोबिया और चुनाव का महत्व
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आतंकवादी गुट दाइश अपने अंत के निकट है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १५, २०१७ १२:३२ Asia/Kolkata

आतंकवादी गुट दाइश अपने अंत के निकट है।

ईरान में 19 मई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाले हैं। क्षेत्रीय दृष्टि से यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है। ईरान के विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों की एक महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजी ईरानोफोबिया है। अलबत्ता इससे पहले भी इस स्ट्रैटेजी का प्रयोग पश्चिमी शक्तियों ने किया है परंतु हालिया वर्षों में ईरान के क्षेत्रीय विरोधी व प्रतिस्पर्धी भी इस नीति का प्रयोग कर रहे हैं।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के दो मूल प्रतिस्पर्धी सऊदी अरब और तुर्की विशेषकर सऊदी अरब ने प्रतिस्पर्धा को शत्रुता में बदल दिया है और उन्होंने क्षेत्र में ईरान के प्रयासों को विफल बनाने के लिए बहुत प्रयास किये हैं परंतु उनके प्रयासों का दृष्टिगत व वांछित परिणाम नहीं निकल सका।

सीरिया संकट के बारे में ईरान का दृष्टिकोण स्पष्ट व बेहतर है इस प्रकार से कि सीरियाई सरकार और विरोधियों के मध्य जो संघर्ष विराम चल रहा है तुर्की और रूस उसकी निगरानी कर रहे हैं परंतु सऊदी अरब ने सीरिया संकट के दौरान भारी खर्च करने के बावजूद सीरिया संकट के समाधान के लिए जो वार्ताएं व बैठकें हुईं हैं उनसे दूर ही रहा है।

सऊदी अरब ने इराक की शीया सरकार को आतंकवादी गुट दाइश के माध्यम से कमजोर करने के लिए बहुत प्रयास किया परंतु इराकी सरकार और इस देश के स्वयं सेवी बलों ने ईरान के समर्थन से ध्यान योग्य सफलताएं अर्जित कर ली हैं और आतंकवादी गुट दाइश अपने अंत के निकट है।

इसी प्रकार सऊदी अरब यमन में अंसारुल्लाह आंदोलन को, जिसे ईरान का नैतिक समर्थन प्राप्त है, मज़बूत होने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है परंतु गत दो वर्षों से सऊदी अरब निर्धन देश यमन पर पाश्विक हमले जारी रखे हुए है और आज तक वह अपने मूल लक्ष्य अर्थात मंसूर हादी को दोबारा सत्ता में लाने में सफल नहीं हो सका है।

इस प्रकार के क्षेत्रीय वातावरण में तुर्की और सऊदी अरब ईरानोफोबिया के परिप्रेक्ष्य में यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि ईरान पश्चिम एशिया में सुन्नी मुसलमानों को हाशिये पर डालने और शीया मुसलमानों को मजबूत करने के प्रयास में है।

बहरहाल सऊदी अरब की तानाशाही सरकार के विपरीत ईरान का लोकतंत्र बहुत मज़बूत है और वह क्षेत्रीय देशों के लिए न केवल किसी प्रकार का खतरा नहीं है बल्कि यहां का धार्मिक लोकतंत्र क्षेत्र के दूसरे देशों के लिए आदर्श व मूल्यवान भी समझा जाता है। MM