यमनियों को ईरान के हथियारों की कोई आवश्यकता नहीं हैःविदेशमंत्रालय
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जो चीज़ निश्चित है वह यह है कि यमन पर हमला करके सऊदी अरब ने क्षेत्र को अशांत कर दिया है और क्षेत्र में आतंकवाद के फलने- फूलने और दसियों हज़ार व्यक्तियों के बेघर होने का कारण बना है
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १५, २०१७ १५:३४ Asia/Kolkata

जो चीज़ निश्चित है वह यह है कि यमन पर हमला करके सऊदी अरब ने क्षेत्र को अशांत कर दिया है और क्षेत्र में आतंकवाद के फलने- फूलने और दसियों हज़ार व्यक्तियों के बेघर होने का कारण बना है

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने लंदन से अरबी भाषा में प्रकाशित होने वाली “अरअरबी अलजदीद” पत्रिका के साथ साक्षात्कार में कहा है कि यमनियों के पास बहुत अधिक हथियार हैं और सऊदी अरब इस वास्तविकता पर ध्यान दिये बिना सोचता है कि बहुत थोड़े से समय में समस्त चीज़ें उसके हित में समाप्त हो जायें।

उन्होंने 26 मार्च वर्ष 2015 से यमन के विरुद्ध आरंभ होने वाले सऊदी अरब के हमले की ओर संकेत किया और ईरान द्वारा यमनियों को हथियार दिये जाने की अफवाह का खंडन किया और कहा कि कुछ देश ईरान पर यमन में हथियारों की तस्करी करने का आरोप लगाते हैं जबकि ईरान की न तो यमन युद्ध में सैनिक उपस्थिति है और न ही यमनियों को ईरान के हथियारों की कोई आवश्यकता है।

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम कासेमी ने बल देकर कहा कि सऊदी अरब को चाहिये कि वह ईरान पर आरोप लगाने और तेहरान विरोधी अपनी नीति को बंद करे और इस प्रकार की स्थिति में तेहरान रियाज़ के साथ वार्ता के लिए तैयार है।

यमनियों को ईरान द्वारा हथियार देने पर आधारित ख़बरों को हर कुछ समय पर संचार माध्यमों में स्थान दिया जाता है ताकि इस दावे का बहाना बने कि ईरान यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है।

रोचक बात यह है कि यह आरोप कभी भी सिद्ध न हो सका है कि ईरान यमन सहित अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है और संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी स्वीकार किया है कि ईरान की ओर से यमनी गुटों के लिए कोई हथियार नहीं भेजा गया है। ईरान पर इस प्रकार के जो निराधार आरोप लगाये जाते हैं उसके दो लक्ष्य हो सकते हैं।

पहला लक्ष्य क्षेत्र में ईरान की भूमिका से खतरे का आभास उत्पन्न करना। सऊदी अरब इस बहाने से यमन पर अपने पाश्विक हमले और प्रतिदिन मारे जाने वाले निर्दोष यमनियों के विरुद्ध अतिक्रमण को वैध दर्शाना चाहता है जबकि यमन पर सऊदी अरब का हमला आरंभ से ही खुला अतिक्रमण है और किसी प्रकार उसके पाश्विक हमलों का औचित्य नहीं दर्शाया जा सकता।

यही नहीं जो देश सऊदी अरब के लिए प्रतिबंधित हथियारों का निर्यात कर रहे हैं और सऊदी अरब उन हथियारों का प्रयोग यमन की निर्दोष जनता के विरुद्ध कर रहा है उन्हें भी इस संबंध में जवाब देना चाहिये।

ईरान पर यमनी गुटों के लिए हथियार भेजने का जो निराधारा आरोप लगाया जाता है उसका दूसरा लक्ष्य यमन पर वर्चस्व जमाने हेतु सऊदी अरब की विफलता पर पर्दा डालना हो सकता है।

बहरहाल जो चीज़ निश्चित है वह यह है कि यमन पर हमला करके सऊदी अरब ने क्षेत्र को अशांत कर दिया है और क्षेत्र में आतंकवाद के फलने- फूलने और दसियों हज़ार व्यक्तियों के बेघर होने का कारण बना है और ईरान क्षेत्र का एक शक्तिशाली देश है और उसे क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है और वह सीरिया की भांति राजनीतिक मार्ग से यमन संकट के भी समाधान का पक्षधर है। MM