चुनाव में जनता की भागीदारी, प्रतिष्ठा का कारण बनेगीः हुसैन देहकान
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शुक्रवार को मतदान केन्द्रों पर लोगों की भारी उपस्थिति, इस्लामी क्रांति के बाकी रहने को सुनिश्चित बनायेगी और वह ईरान की प्रगति, प्रतिष्ठा और गौरव का कारण बनेगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १७, २०१७ १४:५९ Asia/Kolkata

शुक्रवार को मतदान केन्द्रों पर लोगों की भारी उपस्थिति, इस्लामी क्रांति के बाकी रहने को सुनिश्चित बनायेगी और वह ईरान की प्रगति, प्रतिष्ठा और गौरव का कारण बनेगी।

ईरान की इस्लामी व्यवस्था के जीवन काल में चुनाव विशेषकर राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनावों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विशेष महत्व प्राप्त रहा है। 19 मई को एक बार फिर ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाला है और पूरी दुनिया देख लेगी कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था को अब भी भारी जनसमर्थन प्राप्त है।

ईरान के रक्षामंत्री ब्रिगेडियर जनरल हुसैन देहकान ने क्षेत्र की स्थिति और युद्ध व हिंसा जारी रखने हेतु अमेरिका, जायोनी शासन और आले सऊद के खतरनाक षडयंत्रों की ओर संकेत किया और कहा कि राष्ट्रपति पद के आगामी चुनाव में एकता व एकजुटता का प्रदर्शन करके ईरान इन षडयंत्रों को निष्क्रिय बना सकता है।

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मतदान केन्द्रों पर लोगों की भारी उपस्थिति, इस्लामी क्रांति के बाकी रहने को सुनिश्चित बनायेगी और वह ईरान की प्रगति, प्रतिष्ठा और गौरव का कारण बनेगी।

ईरानी जनता ने चुनावों में बढ़चढ़ कर भाग लेकर चुनौतियों और दुश्मनों को करारा जवाब दिया है। ईरान के राष्ट्रपति पद में इस बार जो लोग उम्मीदवार हैं उन्होंने थोड़े बहुत अन्तर के साथ अपने-2 कार्यक्रमों को बयान किया है।

गत 38 वर्षों के दौरान ईरान में औसतन हर साल एक चुनाव हुआ है और ईरान- इराक युद्ध के दौरान भी चुनाव समय पर हुए हैं और उनमें एक दिन का भी विलंब नहीं हुआ है।

इस प्रक्रिया का जारी रहना ईरानी राष्ट्र की शक्ति में वृद्धि का कारण बना है और जनता की भारी उपस्थिति ने दुश्मनों के बहुत से षडयंत्रों को विफल बना दिया और इस समय भी दुश्मनों के षडयंत्र और धमकियां समाप्त नहीं हुई हैं बल्कि वे पहले से भी अधिक जटिल रूप धारण कर गयी हैं और इस्लामी व्यवस्था के अंदर से इसे कमज़ोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

चुनाव के संवेदनशील समय में शत्रुओं का मूल लक्ष्य जनता को चुनावों में भाग लेने से दूर रखना रहा है क्योंकि इस्लामी व्यवस्था के शत्रु भली-भांति जानते हैं कि चुनावों में जनता की उपस्थिति एकता व एकजुटता का कारण बनेगी।

इस दृष्टि से चुनाव में जनता की उपस्थिति वास्तविक अर्थों में शत्रुओं के षडयंत्रों, चुनौतियों और धमकियों के मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट है। MM