दाइश, जंगली कुत्ता और कुत्ते का शिकार बहुत आसान हैः ईरानी कमान्डर
ईरान की सशस्त्र सेना के वरिष्ठ कमान्डर ने कहा है कि अमरीका में सत्तासीन पार्टी वर्चस्ववादी है और यदि उसने अपना रवैया नहीं बदला तो हम उसे उसका रवैया बदलने पर मजबूर कर देंगे।
तसनीम न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सशस्त्र सेना के कमान्डर सैयद मसऊद जज़ाएरी का कहना है कि अमरीका में सत्तासीन पार्टी, वर्चस्ववादी और विस्तारवादी है, वह लोगों से ज़ोर ज़बरदस्ती करती है और ग़ुंडा टैक्स लेती है। उनका कहना था कि इस्लामी क्रांति के आरंभ से ही ईरानी राष्ट्र, क्रांति और आईआरजीसी सहित व्यवस्था के प्रभावी तंत्रों से अमरीका की दुश्मनी से भलिभांति अवगत है।
ईरान की सशस्त्र सेना के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा है कि अलबत्ता अमरीका को अपना रवैया बदलना चाहिए नहीं तो हम अमरीका को उसका रवैया बदलने पर मजबूर कर देंगे। जनरल जज़ाएरी ने कहा कि दुनिया आतंकवाद को अमरीका और ज़ायोनिज़्म का सौतेला बाप कहती है और यह इतिहास का एक कटाक्ष है कि आतंकवादी अमरीका, आईआरजीसी को आतंकवाद का समर्थक बताता है जिसने अपने गठन के आरंभ से ही आतंकवाद से संघर्ष किया और इराक़ी, फ़िलिस्तीनी और सीरियाई जनता का समर्थन किया। जनरल जज़ाएरी ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक ने आरंभ से ही अमरीका को बड़े शैतान की संज्ञा दी है।
दूसरी ओर ईरान की सशस्त्र सेना के एक अन्य कमान्डर अताउल्लाह सालेही का कहना है कि देश की पश्चिमी सीमाओं पर किसी भी प्रकार का कोई ख़तरा नहीं है। उनका कहना था कि दाइश हमारे लिए एक जंगली कुत्ते की भांति है, हम उसका काम न केवल सरलता से तमाम कर सकते हैं बल्कि उनके स्वामियों को मुंहतोड़ उत्तर भी दे सकते हैं।
सशस्त्र सेना के कमान्डर आज सुबह देश की पश्चिमी सीमा विशेषकर सीमावर्ती शहर नफ़्त का दौरा किया और वहां पर तैनात सुरक्षा बलों के साहस की सराहन की। उन्होंने कहा कि सेना के जवान सीमा पर रक्षा के लिए ही केवल तैनात नहीं हैं बल्कि शिकार के लिए भी तैनात हुए हैं। उन्होंने ईश्वर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और यह सुरक्षा, देश के जवानों की देन है।
उधर ईरान की सशस्त्र सेना के कमान्डर इन्चीफ़ के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि अमरीका, इराक़ व सीरिया में सलाहकारों के स्तर पर दी जाने वाली मदद में ईरान की सिपाहे पासदारान आईआरजीसी की आप्रेश्नल और इन्टेलीजेंस क्षमताओं को समझ चुका है और उसने ईरान से भारी पराजय खाई है।
ईरान की सशस्त्र सेना के कमान्डर इन्चीफ़ के वरिष्ठ सलाहकार जनरल यहिया रहीम सफ़वी ने रविवार को एक बयान में कहा कि ईरान की रणनैतिक व्यवस्था में युद्ध का आरंभ और हमले की पहल करना शामिल नहीं है और ईरान, क्षेत्र में समस्त देशों की भागीदारी से फ़ार्स की खाड़ी और पश्चिमी एशिया में शांति और स्थिरता पैदा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपनी इसी रणनीति के आधार पर आतंकवाद के विरुद्ध आप्रेशन आरंभ किया है।
श्री यहिया रहीम सफ़वी ने दक्षिण पश्चिमी एशिया में तनाव फैलाने में अमरीका के रणनैतिक लक्ष्यों और उसके क्षेत्रीय पिट्ठुओं की भूमिका के बारे में कहा कि सऊदी अरब और क्षेत्र के कुछ अरब देश अमरीका के हाथ का खिलौना बने हुए हैं और क्षेत्र में सोची समझी योजना के अंतर्गत तनाव का परिणाम केवल यह निकलेगा कि क्षेत्र के देशों में हथियारों की होड़ आरंभ हो जाएगी जिससे अमरीका को अपने हथियार बेचने का अवसर मिलेबा और इस प्रकार अमरीका को अरब और इस्लामी देशों के वित्तीय स्रोत को लूटने का मौक़ा भी मिल जाएगा।
उन्होंने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीका की झूटी शक्ति के बारे में कहा कि अमरीका और इस्राईल की शक्ति क्षीण हो रही है और इस बात का अनुमान, सीरिया में क़ानूनी सरकार का तख़्ता उलटने में अमरीका की विफलता से भलिभांति लगाया जा सकता है। (AK)