अमेरिकियों पर भरोसा नहीं करना चाहियेः वरिष्ठ नेता
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दाइश से अमेरिका का विरोध वास्तविक विरोध नहीं है
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २१, २०१७ १४:२९ Asia/Kolkata

दाइश से अमेरिका का विरोध वास्तविक विरोध नहीं है

इराक के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने तेहरान में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से  भेंट की। इस भेंट में इराकी प्रधानी ने वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई और राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी से भेंट में द्विपक्षीय मामलों, क्षेत्र के महत्वपूर्ण परिवर्तनों और आतंकवाद से मुकाबले के बारे में वार्ता की।

इस भेंट में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले में इराक के समस्त राजनीतिक और धार्मिक गुटों और स्वयं सेवी बलों की एकता की प्रशंसा की और उसे इराक में शक्ति का महत्वपूर्ण कारक बताते हुए बल देकर कहा कि अमेरिकियों पर किसी प्रकार भरोसा न करें क्योंकि वे आघात लगाने के लिए अवसर की प्रतीक्षा में हैं।

वर्ष 2003 में अमेरिका द्वारा इराक के सैनिक अतिग्रहण और इस देश के संबंध में उसकी विभिन्न नीतियों ने अमेरिका को ऐसे देश में परिवर्तित कर दिया है जिस पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता और हर स्थिति में वह अपने केवल साम्राज्यवादी हितों को साधने की चेष्टा में रहता है।

इराकी सम्प्रभुता और आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में अमेरिका की दोहरी नीतियां और इसी प्रकार इराक को आघात पहुंचाने हेतु अमेरिका द्वारा विशेष इराकी गुटों का समर्थन वे चीज़ें हैं जिनके कारण एकजुट व स्वतंत्र इराक में उसका कोई स्थान नहीं है।

इराक के स्वयं सेवी बल से अमेरिकी विरोध इराक से अमेरिकी शत्रुता का स्पष्ट सूचक है क्योंकि स्वयं सेवी बल आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले में प्रभावी व सार्थक भूमिका निभा रहा है।

इराक के स्वयं सेवी बल इस देश की सेना के साथ मिलकर दाइश का मुकाबला कर रहे हैं और इस समय वे इराक- सीरिया सीमा पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर आतंकवाद गुट दाइश को भारी क्षति पहुंचा रहे हैं और यह ऐसा विषय है जो अमेरिका को बिल्कुल पसंद नहीं है और उसने इराक के स्वयं सेवी बलों के संबंध में सदैव शत्रुतापूर्ण रवइया अपनाया है।

बहरहाल आतंकवादी गुट दाइश से प्रभावी ढंग से मुकाबला करने वाले स्वयं सेवी बल से अमेरिकी शत्रुता आतंकवाद से मुकाबले में उसके दोहरे रवइये का सूचक है और ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि दाइश से अमेरिका का विरोध वास्तविक विरोध नहीं है और क्षेत्र के कुछ देश भी दाइश का समूल अंत नहीं चाहते हैं क्योंकि दाइश उनके समर्थन और पैसों से ही अस्तित्व में आया है और वे चाहते हैं कि उनके नियंत्रण में रहने में रहने वाला दाइश इराक में मौजूद रहे। MM