ईरान, दाइश की बिसात लपेट कर रहेगाः आईआरजीसी
इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी ने कहा है कि ईरान आतंकी गुट दाइश की बिसात लपेट कर ही दम लेगा।
आईआरजीसी के उप कमांडर जनरल हुसैन सलामी ने ईरान के टीवी चैनल-1 से बात करते हुए कहा है कि इस्लामी जगत में तकफ़ीरी आतंकवाद और दाइश का फ़ितना अमरीका, ब्रिटेन और ज़ायोनी शासन ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए बोया है। उन्होंने कहा कि जब ज़ायोनी शासन ने दक्षिणी सीरिया में ईरान के कमांडर अल्लाहदादी और कुछ अन्य को शहीद किया तो हमने कहा था कि हम बदला लेंगे और कुछ ही दिन बाद हमने बदला ले लिया। जब तकफ़ीरियों ने संसद पर हमला किया और कई निर्दोष लोगों की हत्या कर दी तो हमने कहा था कि हम बदला लेंगे और हमने यह काम किया। आज भी हम यह घोषणा करते हैं कि शहीद मोहसिन हुजजी की शहदात का बदला लेंगे और दाइश की बिसात लपेट देंगे और इस पर उन पर जो वार होगा वह पहले से कहीं घातक होगा।
आईआरजीसी के उप कमांडर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि अमरीका, ब्रिटेन, इस्राईल और उनके कुछ क्षेत्रीय घटकों ने इस्लामी जगत में ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश को अस्तित्व प्रदान किया है क्योंकि वे ज़मीनी स्तर पर ईरान के प्रभाव को रोकने की क्षमता नहीं रखते। इसी लिए उन्होंने शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच मतभेद की आग भड़काने के लिए तकफ़ीरी आतंकवाद को जन्म दिया है।
जनरल सलामी ने कहा कि अमरीकी फ़ार्स की खाड़ी से पूरी तरह अवगत हैं और जानते हैं कि यह संसार की 50 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा का स्रोत है और इस समय संसार में प्रयोग होने वाला 20 प्रतिशत ईंधन यहीं से हो कर गुज़रता है। इसी के साथ वे यह भी जानते हैं कि इस क्षेत्र का जियोपोलिटिकल महत्व क्या है और ऊर्जा व व्यापार की सुरक्षा और अमरीका की घटक सरकारों का अस्तित्व इसी क्षेत्र के अस्तित्व पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर फ़ार्स की खाड़ी में कोई भी दुर्घटना होती है तो संसार की ऊर्जा की सुरक्षा ख़त्म हो जाएगी। जनरल सलामी ने कहा कि अमरीकी, हमारी केवल कुछ ही क्षमताओं से अवगत हैं और हमारी शक्ति के बड़े भाग के बारे में उन्हें पता नहीं है। उन्होंन कहा कि अगर फ़ार्स की खाड़ी में लड़ाई होती है तो फिर इस क्षेत्र में उनके सभी हित इसकी चपेट में आ जाएंगे और यह लड़ाई ज़ायोनी शासन की ओर उसकी समाप्ति की ओर बढ़ जाएगी। (HN)