क़तर का ईरान के साथ संबंध मज़बूत करने पर बल
क़तर के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एलान किया कि दोहा अपना राजदूत तेहरान वापस भेज रहा है। क़तर के विदेश मंत्रालय ने इस क़दम का उद्देश्य दोनों देश के बीच संबंध को मज़बूत करना बताया। क़तर ने पिछले साल जनवरी में सऊदी अरब के दबाव में ईरान से अपना राजदूत वापस बुला लिया था।
5 जून को 2017 को सऊदी अरब ने मिस्र, यूएई और बहरैन के साथ मिलकर क़तर पर रियाज़ की अगुवाई में अरब बिरादरी के साथ न होने का इल्ज़ाम लगाकर उससे अपने कूटनैतिक संबंध तोड़ने का एलान किया और क़तर की ज़मीनी, समुद्री और हवाई नाकाबंदी कर दी। ऐसे हालात में ईरान ने अपनी हवाई सीमा क़तर की उड़ानों के लिए खोल दीं ताकि वह खाद्य पदार्थ सहित ज़रूरत की चीज़ें मुहैया कर सके।
इन चारों देशों ने क़तर से संबंध सामान्य करने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं जिसमें ईरान, हिज़्बुल्लाह सहित फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता गुटों से संबंध तोड़ने की शर्त शामिल थी लेकिन इस संबंध में दोहा की दृढ़ता से सऊदी अरब और उसके घटकों की क़तर पर अन्यायपूर्ण दृष्टिकोण थोपने की कोशिश नाकाम हो गयी।
क़तर और सऊदी अरब के संबंध में तनाव वास्तव में सऊदी अरब की अरब नेटो फ़ोर्स बनाने में नाकामी को दर्शाती है। आले सऊद ने अमरीका के इशारे पर इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ अरब नैटो फ़ोर्स बनाने की कोशिश की, लेकिन सऊदी अरब और उसके कुछ घटकों के साथ क़तर के मतभेद ने यह दर्शा दिया कि अरब नैटो फ़ोर्स का गठन व्यवहारिक नहीं हो सकता बल्कि क़तर, ओमान और कुवैत इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ संबंध विस्तार पर बल देते हैं और इन हालात में सऊदी अरब और अंगुली पर गिने चुने उसके घटक पहले से ज़्यादा अलग थलग पड़ गए हैं। दूसरी ओर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हालात ने विश्व स्तर पर ईरान की कूटनैतिक क्षमता को पहले से ज़्यादा स्पष्ट कर दिया है। (MAQ/N)