ईरान के बारे में असमा जहांगीर की रिपोर्ट का खंडन
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ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार परिषद की विशेष रिपोर्टर की नई रिपोर्ट, राजनैतिक लक्ष्यों के आधार पर तैयार की गयी है और ईरान इस रिपोर्ट को पूरी तरह रद्द करता है।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Sep ०३, २०१७ १२:५० Asia/Kolkata

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार परिषद की विशेष रिपोर्टर की नई रिपोर्ट, राजनैतिक लक्ष्यों के आधार पर तैयार की गयी है और ईरान इस रिपोर्ट को पूरी तरह रद्द करता है।

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने कहा कि खेद की बात यह है कि ईरान की ओर से तर्क संगत निरंतर जवाबों के बावजूद ईरान के विरुद्ध निराधार दावे पेश किए गये। संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेष रिपोर्टर ने जिन चीज़ों का वर्णन किया गया है वह ग़लत है और ईरान में मानवाधिकार के बारे में रिपोर्टर ने जो सूचनाएं दी हैं उनका वास्तविकताओं से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है और इसको अविश्वसनीय स्रोतों से तैयार किया गया है जिसके कारण रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है।

इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ही ईरान पर दबाव डालने के लिए मानवाधिकार को सदैव एक हथकंडे के रूप में प्रयोग किया गया है। पश्चिम हमेशा से दूसरे स्वतंत्र देशों पर दबाव डालने के लिए इस हथकंडे से लाभ उठाता है। इस्लामी गणतंत्र ईरान एक एेसा स्वतंत्र देश है जो मानवाधिकार के बारे में सदैव से पश्चिमी देशों का निशाना बना रहा है। 

ईरान में मानवाधिकार की स्थिति की समीक्षा के लिए विशेष रिपोर्टर के चयन से पता चलता है कि ईरान में मानवाधिकार की स्थिति को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है और यही कारण है कि ईरान के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद की विशेष रिपोर्टर ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसका आधार पर अपुष्ट और अविश्वसनीय स्रोत है।  इसी संबंध में ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख आयतुल्लाह सादिक़ आमुली लारीजानी ने पिछले सोमवार को कहा था कि ईरान के शत्रुओं, क्रांति विरोधी गुटों और आतंकवादी गुट एमकेओ ने पिछले वर्ष के दौरान जो भी ईरान विरोधी बयान किए उन सब चीज़ों को ईरान के बारे में मानवाधिकार परिषद की विशेष रिपोर्टर की रिपोर्ट में देखा जा सकता है।

बहरहाल ईरान पर मानवाधिकार के बहाने दबाव डालने का हथकंडा पुराना हो गया है और ईरानी अधिकारियों ने आरंभ से ही इस प्रकार के दावों का खंडन किया है। (AK)