विश्व समुदाय से कोई उम्मीन नहीं रहीः आयतुल्लाह केरमानी
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आयतुल्लाह मोवह्हेदी केरमानी ने कहा है कि अब विश्व समुदाय से कोई उम्मीद नहीं रही है इसलिए मुसलमान राष्ट्रों को रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध किये जा रहे अत्याचारों के विरोध में उठ खड़े होना चाहिए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ०८, २०१७ १४:१० Asia/Kolkata
  • विश्व समुदाय से कोई उम्मीन नहीं रहीः आयतुल्लाह केरमानी

आयतुल्लाह मोवह्हेदी केरमानी ने कहा है कि अब विश्व समुदाय से कोई उम्मीद नहीं रही है इसलिए मुसलमान राष्ट्रों को रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध किये जा रहे अत्याचारों के विरोध में उठ खड़े होना चाहिए।

आयतुल्लाह केरमानी ने यह बात तेहरान में नमाज़े जुमा के ख़ुत्बे में कही।  उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध किये जा रहे सुनियोजित हमलों को रुकवाने में विश्व समुदाय से अब बिल्कुल भी आशा नहीं रही।  एेसे में इन अत्याचारों के खि़लाफ़ मुसलमान राष्ट्रों को सामने आना चाहिए।

आयतुल्लाह केरमानी ने रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार में ज़ायोनी शासन की भूमिका की ओर संकेत करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर किये जाने वाले जनसंहार पर विश्व समुदाय विशेषकर मानवाधिकारों की सुरक्षा का दम भरने वालों की ख़ामोशी से यह सिद्ध होता है कि इस बारे में विश्व समुदाय से आशा रखना व्यर्थ है।

ज्ञात रहे कि ईरान ने म्यांमार के अत्याचारग्रस्त रोहिंग्या मुसलमानों की सहायता के उद्देश्य से मानवीय सहायता रवाना की है जो बांग्लादेश की सीमा पर शरण लिए रोहिंग्या मुसलमानों तक पहुंच गई है।  इस राहत सामग्री में खाद्य पदार्थ और आवश्यकता की अन्य वस्तुएं शामिल हैं। यह सहायता ईरान के कई ग़ैर सरकारी संगठनों ने संयुक्त रूप में भेजी है।

जुमे के अपने संबोधन के दूसरे भाग में आयतुल्लाह मोवह्हेदी केरमानी ने अमरीका की ओर से ईरान के सैन्य केन्द्रों के निरीक्षण के प्रयास की ओर संकेत किया।  उन्होंने कहा कि अमरीका का यह सपना कभी भी साकार नहीं होगा।

आयतुल्लाह मोवह्हेदी केरमानी ने इस बात का उल्लेख किया कि अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी आईएईए अपनी विभिन्न रिपोर्टों में कई बार इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण हैं।

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी सैन्य केन्द्रों के निरीक्षण पर आधारित अमरीकी अधिकारियों की मांग पर अपनी प्रतिक्रिया स्वरूप कहा था कि यह मांग, अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विपरीत है जो कभी पूरी नहीं होगी।