पूरी दुनिया करबला वालों के शोक मे डूबी
जैसे-जैसे आशूर का दिन नज़दीक आ रहा है वैसे-वैसे करबला वालों का शोक मनाने वाले ग़म में डूबते जा रहे हैं और मजलिस और मातम में तेज़ी आ रही है।
इराक़ से हमारे साथी क़मर अब्बास की रिपोर्ट के मुताबिक़ पवित्र नगर करबला में इस समय लाखों की संख्या में अज़ादार मौजूद हैं और लगातार श्रद्धालुओं का करबला पहुंचने का सिलसिला जारी है। श्रद्धालू गुटों के रूप में पैदल और वाहनों के माध्यम से पवित्र नगर करबला पहुंचना शुरू हो गए हैं।
हमारे प्रतिनिधि का कहना है कि पवित्र नगर करबला की ओर जाने वाले सभी रास्ते इमाम हुसैन (अ) के श्रद्धालुओं के छोटे बड़े काफ़िलों और कारवानों से भरे हुए हैं। करबला की ओर जाने वाले हर श्रद्धालू का एक ही उद्देश्य है कि वह आशूर के दिन करबला पहुंचकर इमाम हुसैन और उनके साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सके।
इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, इराक़ी सेना और स्वयंसेवी बलों के जवान चप्पे-चप्पे पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। जगह-जगह चेक पोस्ट और बंकर स्थापित किए गए हैं ताकि करबला पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित बनाई जा सके।
पवित्र नगर करबला के गवर्नर और इमाम हुसैन (अ) के रौज़े के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने 9 और 10 मोहर्रम को करबला में होने वाले विशाल अज़ादारी के कार्यक्रम की व्यवस्था पूरी कर ली है। करबला के गवर्नर का कहना है कि पवित्र नगर करबला इमाम हुसैन (अ) के श्रद्धालुओं की मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस्लाम गणतंत्र ईरान में भी करबला वालों की याद में आयोजित होने वाली शोक सभाओं का सिलसिला जारी है और देश के सभी शहरों और गावों में मजलिस और मातम पूरे शिखर पर है। शुक्रवार को आठ मोहर्रम का दिन था इसलिए पूरे ईरान में इमाम हुसैन के भाई हज़रत अब्बास के नाम के विशेष जुलूस निकाले गए। ईरान में हज़रत अब्बास की याद में ज़नजान शहर में सबसे बड़ा और पारंपरिक एक विशाल जुलूस निकाला जाता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालू भाग लेते हैं।
दूसरी ओर भारत और पाकिस्तान में भी इमाम हुसैन (अ) के वफ़ादार भाई हज़रत अब्बास (अ) की याद पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर विभिन्न शहरों और गावों में मजलिस व मातम के साथ-साथ हज़रत अब्बास की याद में अलम भी निकाले गए। इस अवसर पर जगह-जगह पानी और शर्बत की सबीलें भी लगाई गईं। (RZ)