फिलिस्तीन इस्लामी जगत का पहला मुद्दा हैः विलायती
अली अकबर विलायती ने कहा कि बैरूत में इस्लामी जगत के बड़े- बड़े धर्मगुरूओं के एकत्रित होने का अर्थ यह है कि फिलिस्तीन की स्वतंत्रता का रास्ता प्रतिरोध है और तथाकथित वार्ता का कोई स्थान नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार ने कहा है कि फिलिस्तीन इस्लामी जगत का पहला मुद्दा है।
लेबनान में फिलिस्तीन के बारे में होने वाली अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स में वरिष्ठ नेता के सलाहकार अली अकबर विलायती ने कहा कि फिलिस्तीन इस्लामी जगत का पहला मुद्दा है और रहेगा।
उन्होंने गत रात्रि बैरूत में इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स की समाप्ति समारोह में कहा कि यह कांफ्रेन्स वरिष्ठ नेता के संदेश से आरंभ हुई और यह इस बात का सूचक है कि उनकी नज़र में फिलिस्तीन मुद्दे का क्या महत्व है।
उन्होंने कहा कि निर्लज्जता के साथ क्षेत्र के कुछ देश और अमेरिका एवं ब्रिटेन के पिछलग्गू जायोनी शासन से संबंध सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
अली अकबर विलायती ने कहा कि बैरूत में इस्लामी जगत के बड़े- बड़े धर्मगुरूओं के एकत्रित होने का अर्थ यह है कि फिलिस्तीन की स्वतंत्रता का रास्ता प्रतिरोध है और तथाकथित वार्ता का कोई स्थान नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार ने इस्राईल की विशिष्टता के बारे में कहा कि फिलिस्तीन की राष्ट्रीय सहमति की योजना को स्वीकार करने के लिए इस्राईल ने तीन शर्तें रखी है।
पहली शर्त यह है कि फिलिस्तीनी संघर्षकर्ता अपने हथियारों को रख दें और दूसरी शर्त यह कि वह जायोनी शासन को औपचारिकता प्रदान करें और तीसरी शर्त यह है कि ईरान से संबंध तोड़ लें।
अली अलकर विलायती ने स्पष्ट किया कि हमास आंदोलन ने घोषणा की है कि पहली और दूसरी शर्त प्रतिरोध की रेड लाइन है किन्तु तीसरी शर्त का जवाब हमास ने बात के बजाये अपने अमल से दिया और उसने एक उच्च प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा ताकि इस्राईल जान ले कि ईरान से संबंध विच्छेद कर लेने की आकांक्षा वह क़ब्र में ले जाये।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभ से फिलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन में गम्भीर रहा है और महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि इस्लामी जगत के विद्वान और धर्मगुरू जायोनियों के मुकाबले में अग्रणी रहे हैं। MM