फ़िलिस्तीन मुद्दे से ईरान के रिश्ते की सच्चाई क्या है?
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इस्लामी गणतंत्र ईरान और फ़िलिस्तीन मामले के संबंधों के बारे में बहुत से लोग सवाल करते हैं कि यह किस प्रकार के संबंध हैं और इसकी गंभीरता का स्तर क्या है? जबकि हालात एसे हैं कि अरब शासक फ़िलिस्तीनियों की आर्थिक, नैतिक और राजनैतिक मदद करने में बहुत पीछे रह गए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २०, २०१८ १७:३७ Asia/Kolkata
  • फ़िलिस्तीन मुद्दे से ईरान के रिश्ते की सच्चाई क्या है?

इस्लामी गणतंत्र ईरान और फ़िलिस्तीन मामले के संबंधों के बारे में बहुत से लोग सवाल करते हैं कि यह किस प्रकार के संबंध हैं और इसकी गंभीरता का स्तर क्या है? जबकि हालात एसे हैं कि अरब शासक फ़िलिस्तीनियों की आर्थिक, नैतिक और राजनैतिक मदद करने में बहुत पीछे रह गए।

मगर इस बीच इस्लामी गणतंत्र ईरान की ओर से फ़िलिस्तीन का समर्थन कभी रुका ही नहीं और इस्लामी गणतंत्र ईरान ने फ़िलिस्तीनियों की वह मदद की जिसने फ़िलिस्तीन मुद्दे को मिटने से बचा लिया।

यदि इस बिंदु को समझना है तो हमास आंदोलन के नेता इसमाईल हनीय की ओर से ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ  नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई को लिखे गए पत्र पर नज़र डालने की ज़रूरत है। यह पत्र बड़े ही संवेदनशील समय में लिखा गया है। इस समय इस्राईल और अमरीका पूर्व योजना के साथ फ़िलिस्तीन मुद्दे को ख़त्म करने की कोशिश में हैं और कुछ अरब सरकारें भी इस योजना में अपने अपने हितों के तहत शामिल हैं।

इसमाईल हनीया के पत्र में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है कि फ़िलिस्तीन मुद्दा जीवित है और दुनिया में इस्लामी गणतंत्र ईरान जैसे महान राष्ट्र हैं जो फ़िलिस्तीन का भरपूर समर्थन कर रहे हैं।

फ़िलिस्तीन को ईरान की ओर से दिया जाने वाला समर्थन सामयिक टैक्टिक नहीं है बल्कि दशकों से ठोस रणनीति के तहत इस्लामी गणतंत्र ईरान फ़िलिस्तीन का समर्थन कर रहा है। इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद ही ईरान ने इस्राईली दूतावास बंद किया और वह दूतावास फ़िलिस्तीन को दे दिया।

इस्लामी गणतंत्र ईरान सामरिक स्तर पर फ़िलिस्तीनी संगठनों की इस तरह से मदद कर रहा है कि इस्राईल लाख कोशिश के बावजूद फ़िलिस्तीनी संगठनों को समाप्त नहीं कर पाया है बल्कि हमास और जेहादे इस्लामी जैस संगठनों के मिसाइलों और आक्रमक सुरंग तकनीक से इस्राईल हमेशा डरा रहता है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि वह इस्राईल से लड़ने वाले हर संगठन की मदद करने के लिए तैयार है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने साफ़ साफ़ कहा है कि अमरीका ने बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित कर तो दिया है लेकिन व्यवहारिक रूप से वह अपनी इस घोषणा पर अमल नहीं कर सकेगा। इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रयासों से प्रतिरोधक संगठन लगातार मज़बूत हो रहे हैं और इस्राईल को घुटन का एहसास होने लगा है।

ईरान का यह भी मानना है कि 25 साल बाद यदि ईश्वर ने चाहा तो इस्राईल नाम की कोई चीज़ बाक़ी नहीं बचेगी।