सुरक्षा परिषद की आड़ में ईरानोफ़ोबिया का नया षडयंत्र
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संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका की स्थाई प्रतिनिधि, ने इस संघ में सुरक्षा परिषद के राजदूतों की सहायता से ईरानोफ़ोबिया के एक नए षडयंत्र की योजना बनाई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २९, २०१८ ११:५५ Asia/Kolkata
  • सुरक्षा परिषद की आड़ में ईरानोफ़ोबिया का नया षडयंत्र

संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका की स्थाई प्रतिनिधि, ने इस संघ में सुरक्षा परिषद के राजदूतों की सहायता से ईरानोफ़ोबिया के एक नए षडयंत्र की योजना बनाई है।

अमरीका की स्थाई प्रतिनिधि निकी हेली ने एलान किया है कि सुरक्षा परिषद के 14 सदस्य देशों के प्रतिनिधि सोमवार को अमरीकी सेना के मिलिट्री हैंगर को देखने जाएंगे।  वहां पर  अमरीकी प्रतिनिधि निकी हेली उस बैलिस्टिक मिज़ाईल के कुछ टुकड़े दिखाएंगी जो 4 नवंबर 2017 को सऊदी राजधानी रियाज़ के निकट किंग ख़ालिद अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गिरा था।  नवंबर में सऊदी अरब के किंग ख़ालिद एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल गिरने के बाद अमरीका ने दावा किया था कि यह ईरान का बना हुआ है।  अमरीकी दावे के कुछ ही समय के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव के प्रवक्ता ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इस दावे के समर्थन में कोई पुष्ट प्रमाण नहीं मिल सका है जो यह सिद्ध करे कि इसे किस देश ने बनाया है।  इस अमरीकी षडयंत्र के संबन्ध में यमन के अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डाक्टर अब्दुर्रहमान का कहना है कि इस कार्य से अमरीका तीन लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहता है।  वे कहते हैं कि अमरीका का पहला लक्ष्य सऊदी अरब से गुंडा टैक्स लेना।  दूसरा लक्ष्य तेहरान पर दबाव डालना और तीसरा लक्ष्य यमन के मानवीय संकट को पेश करना है।

अमरीका, सऊदी अरब और इस्राईल लंबे समय से यह प्रयास कर रहे हैं कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान को विश्व शांति के लिए ख़तरे के रूप में दर्शाया जाए।  इस बारे में वाशिग्टन पोस्ट ने लिखा है कि अमरीका ने सऊदी अरब को हज़ारों मिसाइलों के अतिरिक्त बहुत  से हथियार दिये हैं जिसके कारण क्षेत्र में अशांति पैदा हो गई है।  टीकाकारों का कहना है कि एेसे में ईरान पर क्षेत्र में अशांति उत्पन्न किये जाने का आरोप लगाया जा रहा है कि जब सऊदी अरब की ओर से यमन का पूरी तरह से परिवेष्टन किया जा चुका है।  वहां पर मिसाइल भेजना तो दूर दवाएं भेजना भी संवभ नहीं रहा है।  बड़ी संख्या में यमनवासी दवाओं की कमी के कारण काल के गाल में समाते जा रहे हैं।