मीज़ाइल क्षमता पर वार्ता नहीं होगीः संसद सभापति
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी ने कहा है कि समस्त पक्षों को चाहिए कि परमाणु समझौते पर अमल करें और ईरान की रक्षा क्षमता को परमाणु समझौते से जोड़ने का प्रयास न करें।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १८, २०१८ १५:३२ Asia/Kolkata
  • मीज़ाइल क्षमता पर वार्ता नहीं होगीः संसद सभापति

इस्लामी गणतंत्र ईरान के संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी ने कहा है कि समस्त पक्षों को चाहिए कि परमाणु समझौते पर अमल करें और ईरान की रक्षा क्षमता को परमाणु समझौते से जोड़ने का प्रयास न करें।

इस्लामी गणतंत्र ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी ने तेहरान में ओमान के विदेशमंत्री यूसुफ़ बिन अलवी के साथ मुलाक़ाता में इस बात पर बल देते हुए कि ईरान की मीज़ाइल क्षमता से कुछ देश घबराए हुए हैं, कहा कि ईरान के पास 30 वर्षों से मीज़ाइल क्षमता मौजूद है और यह मामला कोई नया विषय नहीं है और यह कि ईरान ने कभी किसी भी देश पर मीज़ाइल नहीं फ़ायर किया है।

संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी ने बल दिया था कि ईरान, परमाणु समझौते पर प्रतिबद्ध रहा है और यह समझौता उसी स्थिति में बाक़ी रह सकता है जब सामने वाले पक्ष भी इस समझौते पर प्रतिबद्ध रहें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ओमान और सुल्तान क़ाबूस की भूमिका हमेशा लाभदायक रही है और ईरान तथा ओमान के बीच संबंध भी हमेशा मैत्रीपूर्ण और अच्छे रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति अशांत है और क्षेत्रीय देशों सहित समस्त देशों को भी इस तनावग्रस्त स्थिति की वास्तविकता से अवगत होना चाहिए। 

इस मुलाक़ात में ओमान के विदेशमंत्री यूसुफ़ बिन अलवी ने कहा कि कुद देश, ईरान की मीज़ाइल और रक्षा क्षमता से भयभीत हैं जबकि इस में कोई घबराने वाली बात ही नहीं है इसीलिए कि एेसी स्थिति में क्षेत्र की स्थिति संकटमयी बनी हुई है, अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य शक्ति से संपन्न होना, ईरान का मूल अधिकार है।

ओमान के विदेशमंत्री ने कहा कि ईरान और ओमान के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को विस्तृत करने के लिए काफ़ी अवसर पाए जाते हैं और इन संबंधों को भी राजनैतिक संबंधों की भांति विस्तृत किए जाने की आवश्यकता है।

दूसरी ओर ईरान के रक्षामंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने भी कहा है कि ईरान के विरुद्ध इराक़ की सद्दाम सरकार द्वारा थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध का अनुभव है और इसी बात के दृष्टिगत ईरान अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाता रहेगा और मीज़ाइल क्षमता के बारे में कोई वार्ता नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि मीज़ाइल क्षमता, रक्षा से संबंधित है और रक्षा हर देश का मूल अधिकार है। बहराम क़ासिमी ने कहा कि अमरीका इस आधार पर कि ईरान परमाणु समझौते से लाभ न उठाने पाए, दूसरे मुद्दों को इस समझौते से जोड़ने का प्रयास कर रहा है जिनमें मानवाधिकार और मीज़ाइल क्षमता का मामला भी शामिल है।

ईरान के रक्षामंत्रालयय के प्रवक्ता ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का विस्तार, ईरान की विदेश नीति की प्राथमिकता में शामिल है और ईरान, क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग में विस्तार और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की स्थापना में अपनी भरपूर भूमिका अदा कर रहा है। (AK)