अमरीका को ज़रीफ़ की चेतावनीः "परमाणु समझौते से निकल कर पछतावा होगा।"
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i61432-अमरीका_को_ज़रीफ़_की_चेतावनीः_परमाणु_समझौते_से_निकल_कर_पछतावा_होगा
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्री ने परमाणु समझौते से अमरीका के संभावित रूप से निकलने के बारे में कहा है कि निश्चित रूप से ईरान अपने हितों के आधार पर काम करेगा और परमाणु समझौते और इस समझौते से इतर उसके पास क़दम उठाने के लिए व्यापक चयन हैं।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Apr २०, २०१८ १४:०० Asia/Kolkata

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्री ने परमाणु समझौते से अमरीका के संभावित रूप से निकलने के बारे में कहा है कि निश्चित रूप से ईरान अपने हितों के आधार पर काम करेगा और परमाणु समझौते और इस समझौते से इतर उसके पास क़दम उठाने के लिए व्यापक चयन हैं।

मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने न्यूयाॅर्क पहुंचने पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जेसीपीओए से अमरीका के निकलने पर ईरान जो क़दम उठाएगा और विश्व समुदाय अमरीका के क़दम पर जो प्रतिक्रिया दिखाएगा, वह अमरीका के लिए प्रसन्नतादायक नहीं होगा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है कि अगर परमाणु समझौते के तीन यूरोपीय पक्षों ने इस समझौते में सुधार नहीं किया तो अमरीका 12 मई 2018 को इस समझौते से निकल जाएगा। ट्रम्प की धमकियों में गंभीरता आने के बाद यूरोपीय ट्राॅयका अर्थात ब्रिटेन, फ़्रान्स और जर्मनी की कोशिश है कि जैसे भी संभव हो, अमरीका को परमाणु समझौते में बाक़ी रखें। यह तीनों देश अपनी घोषित नीति के अंतर्गत तो परमाणु समझौते को बाक़ी रखने पर बल देते हैं लेकिन व्यवहारिक नीति में उसी मार्ग पर क़दम बढ़ा रहे हैं जो ट्रम्प सरकार ने निर्धारित कर रखा है।

 

परमाणु समझौते या जेसीपीओए के बारे में अमरीका व यूरोप का रवैया यह दर्शाता है कि इसके बारे में मतभेद के बावजूद उनका एक संयुक्त लक्ष्य है और वह है ईरान पर दबाव डालना और उसकी क्षेत्रीय नीतियों व प्रतिरोधक व मीज़ाइल क्षमता पर अंकुश लगाना। एक स्वाधीन देश के रूप में इस्लामी गणतंत्र ईरान दोनों मैदानों में अमरीका व यूरोप की इच्छा के विपरीत काम कर रहा है और उसे इनकी मर्ज़ी की कोई परवाह नहीं है। इस लिए अगर अमरीका व यूरोप परमाणु समझौते की आड़ में ईरान के ख़िलाफ़ कोई काम करते हैं तो उन्हें तेहरान की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। (HN)