ईरान की दृष्टि में स्थाई शांति का आधार
विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि "स्थाई शांति" शीर्षक के अन्तर्गत आयोजित होने वाला सम्मेलन, विश्व शांति के संबन्ध में देशों के दृष्टिकोण जानने का एक उचित अवसर है।
वर्तमान समय में क्षेत्र और विश्व की वास्तविकता यह बताती है कि वैश्विक स्तर पर स्थाई शांति की स्थापना के लिए अथक प्रयासों की आवश्यकता है। अब सवाल यह पैदा होता है कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाने वाली अशांति का कारण राष्ट्रसंघ के चार्टर में दर्ज नियमों का उल्लंघन है या फिर यह वर्चस्ववादी देशों की ज़ोर-जबरदस्ती की वजह से एेसा हो रहा है।
टीकाकारों का कहना है कि वर्तमान समय में संसार में जो संकट पाए जाते हैं उसका मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमरीका और उसके पश्चिम घटकों की युद्धोन्मादी नीतियां हैं। इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान का अतिग्रहण इसकी स्पष्ट मिसाल है। पचास वर्षों से अधिक समय से इस्राईल ने फ़िलिस्तीनियों की भूमि का अतिग्रहण कर रखा है जिसके कारण लाखों फ़िलिस्तीनी पलायन करने पर विवश हुए हैं। इसके अतिरिक्त इस्राईल के हाथों ग़ज़्ज़ा के परिवेष्टन ने इसे एक बहुत बड़े बंदीगृह में परिवर्तित कर दिया है।इस समय लाखों फ़िलिस्तीनी अपनी मातृभूमि से दूर संसार के विभिन्न क्षेत्रों में शरणार्थी का जीवन व्यतीत करने के लिए विवश हैं। विश्व शांति के मार्ग की एक अन्य बाधा निश्सत्रीकरण समझौते का पूरी तरह से लागू न होना भी है।
इन सबके अतिरिक्त एक अन्य समस्या आतंकवाद है जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। आतंकवाद के दिन-प्रतिदिन बढ़ने का एक कारण कुछ सरकारों द्वारा आतंकवादियों का समर्थन है। यह सरकारें, अपने दृष्टिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आतंकवाद को एक हथकण्डे के रूप में प्रयोग कर रही हैं।
इस्लामी गणतंत्र ईरान का मानना है कि संसार में बढ़ती हुई अहिंसा और अशांति का कारण वर्चस्ववाद और दूसरों के अधिकारों का हनन करना है। तेहरान इस बात में विश्वास रखता है कि यदि विश्व में शांति स्थापित करनी है तो फिर राष्ट्रों का सम्मान करते हुए हिंसा तथा ज़ोर ज़बरदस्ती से बचना होगा। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के प्रति पूरी तरह से कटिबद्ध रहना भी ज़रूरी है।