सुरक्षा परिषद ज़ायोनी शासन के बारे में नर्म नीति छोड़ेः ईरान
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इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन को मध्यपूर्व की बदतर स्थिति की मुख्य जड़ क़रार देते हुए सुरक्षा परिषद से इसे अपवाद क़रार देने की नीति को बंद करने की मांग की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २७, २०१८ ०९:१५ Asia/Kolkata
  • सुरक्षा परिषद ज़ायोनी शासन के बारे में नर्म नीति छोड़ेः ईरान

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन को मध्यपूर्व की बदतर स्थिति की मुख्य जड़ क़रार देते हुए सुरक्षा परिषद से इसे अपवाद क़रार देने की नीति को बंद करने की मांग की है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई राजदूत ग़ुलाम अली ख़ुशुरू ने पिछले दिन मध्यपूर्व की स्थिति और फ़िलिस्तीन के मुद्दे विशेषकर फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी अत्याचार और ग़ज़्ज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार के हवाले से संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन मध्यपूर्व की बदतर स्थिति की मुख्य वजह है इसीलिए सुरक्षा परिषद इसे अपवाद क़रार देने की नीति को बंद करे।

इस ईरानी राजनयिक ने कहा कि अमरीका और ज़ायोनियों के गठजोड़ से मध्यपूर्व में ज़ायोनियों की मानवता विरोधी कार्यवाहियों और अपराधों को छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ज़ायोनियों की ओर से फ़िलिस्तीनी की धरती और सीरिया के कुछ क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा जारी है।

श्री ग़ुलाम अली ख़ुशरू ने अमरीका की ओर से बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी क़रार देने के फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा परिषद मध्यपूर्व में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए मदद करने में गंभीर है तो उसे सबसे पहले अवैध ज़ायोनी शासन के साथ नर्मी बरतने की नीति छोड़ना होगी।

 संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई राजदूत ने फ़िलिस्तीनी जनता से सहृदयता व्यक्त करते हुए फ़िलिस्तीनियों के क़ानूनी अधिकार के समर्थन, फ़िलिस्तीनियों की स्वायत्ता और एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी देश के गठन का समर्थन किया जिसकी राजधानी बैतुल मुक़द्दस हो। (AK)