" परमाणु समझौता, वर्तमान दशा में या फिर बिल्कुल नहीं! "
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री डॅाक्टर जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि परमाणु समझौते के लिए एक ही राह है और वह, अमरीका द्वारा अपने वचनों का पालन है।
उन्होंने कहा कि शोर मचाने से या धमकी देने से अमरीका को नया परमाणु समझौता नहीं मिल जाएगा।
परमाणु समझौते के बारे में इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री इस ठोस बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के मामले में पीछे हटने वाला नहीं और धौंस व धमकी से ईरान को मिसाइल कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समझौता करने पर तैयार नहीं किया जा सकता। विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ के हालिया बयान से, अमरीका की धोखा धड़ी और ईरान को दबा कर ट्रम्प को समझौते में बनाए रखने के लिए युरोप की कोशिशों का पता चलता है और इसके साथ ही इस बयान से ईरान की सदभावना एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो जाती है। ईरान किसी भी दशा में अपने मिसाइल कार्यक्रम और पश्चिमी एशिया में अपने प्रभाव के बारे में युरोप या अमरीका के साथ वार्ता नहीं करेगा।
युरोप जिस तरह से मिसाइल कार्यक्रम और पश्चिमी एशिया में ईरान के प्रभाव के बारे में तेहरान पर दबाव डालने का प्रयास कर रहा है उससे एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि युरोप यथावत अमरीका पर निर्भर है और वह किसी भी महत्वपूर्ण मामले में स्वाधीनता से फैसला करने की क्षमता नहीं रखता।
ईरान के विदेशमंत्री ने जिस तरह से बयान दिया है उससे एक बार फिर यह सिद्ध है कि ईरान किसी भी दशा में परमाणु समझौते में नये विषय शामिल नहीं करेगा इस लिए अमरीका और युरोप को फैसला करना और सन 2015 में होने वाले इस समझौते के बारे में सदभावना प्रकट करनी है अन्यथा यह जान लेना चाहिए कि ईरान केवल वर्तमान समझौते को ही स्वीकार करता है। (Q.A.)