जेसीपीओए, योरोप से अपेक्षा और ईरान का अगला क़दम
परमाणु समझौते जेसीपीओए से अमरीका के निकलते ही, ईरान के हितों को सुनिश्चित बनाने की शर्त के साथ इस समझौते को बाक़ी रखने के लिए सघन बातचीत जारी है और जेसीपीओए का चीन, अमरीका और योरोपीय देशों की ओर से समर्थन के बावजूद अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियां लगायीं
इस बात के मद्देनज़र कि जेसीपीओए में शामिल तीन योरोपीय देश ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी, ईरान की क्षेत्रीय भूमिका और उसके मीज़ाईल कार्यक्रम के बारे में डॉनल्ड ट्रम्प की हां में हां मिला रहे हैं, इन तीनों देशों के संबंध में ईरान की संवेदनशीलता कई गुना बढ़ गयी है। जेसीपीओए से अमरीका के निकलने के बाद ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी से उम्मीद है कि वे स्पष्ट नीति अपनाएंगे और व्यवहावरिक रूप से यह साबित करेंगे कि वे जेसीपीओए के पाबंद हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान सरकार ने बल दिया है कि जेसीपीओए के सभी पक्ष और ख़ास तौर पर तीन योरोपीय देश जेसीपीओए को बाक़ी रखने के लिए ज़रूरी क़दम उठाएं और अपने वचन को चरणबद्ध रूप से पूरा करें।
ईरान की नज़र में ऐसा जेसीपीओए उचित है जिससे अमरीका के निकलने के बाद तेल की बिक्री, बैंकिंग संबंध, ईरान में विदेशी कंपनियों की मौजूदगी और पूंजिनिवेश सहित ईरान के आर्थिक हित पूरी तरह सुनिश्चित हों। ऐसे हालात में अगर तीनों योरोपीय देशों के साथ कई हफ़्ते की बातचीत के बाद ईरान इस नतीजे पर पहुंचा कि ईरानी राष्ट्र के हित सुरक्षित नहीं हैं तो ईरान अपनी मौजूदा नीति की पुनर्समीक्षा करेगा।(MAQ/T)