अमरीका कोई मूर्खता नहीं कर सकताः वरिष्ठ नेता
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इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना है कि अमरीका कोई मूर्खता नहीं कर सकता।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
May १८, २०१८ ०३:२३ Asia/Kolkata
  • अमरीका कोई मूर्खता नहीं कर सकताः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना है कि अमरीका कोई मूर्खता नहीं कर सकता।

पवित्र रमज़ान के पहले दिन तेहरान में स्थित इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में पवित्र क़ुरआन की तिलावत की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें वरिष्ठ नेता भी उपस्थित हुए। 

इस बैठक में ईरान भर के प्रसिद्ध क़ारियों और पवित्र क़ुरआन पर शोध करने वालों ने भाग लिया। इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी समाज की आज की महत्वपूर्ण ज़रूरत, पवित्र क़ुरआन से लगाव और उसकी शिक्षाओं पर अमल करना है। 

उनका कहना था कि फ़िलिस्तीन की विषम स्थिति और ज़ायोनी शासन के विशेषकर हालिया दिनों के अपराधों सहित इस्लामी जगत की वर्तमान समस्याएं, इस्लामी जगत की पवित्र क़ुरआन से दूरी का परिणाम है। 

वरिष्ठ नेता ने कहा कि बैतुल मुक़द्दस, फ़िलिस्तीन की राजधानी है और ईश्वरीय कृपा से फ़िलिस्तीन दुश्मनों के हाथों मुक्ति पाएगा और अमरीका और उसके पिछलग्गू, वास्तविकताओं और ईश्वरीय परंपरा के विरुद्ध कोई मूर्खता नहीं सकते। 

उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि जीवन के समस्त आयामों में पवित्र क़ुरआन पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए और इस्लामी जगत की समस्याओं और परेशानियों विशेषकर फ़िलिस्तीनी जनता की विषम स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ दिनों के भीतर हमने देखा कि अवैध ज़ायोनी शासन ने दसियों फ़िलिस्तीनियों को शहीद और हज़ारों को घायल कर दिया और इन हालात में कुछ लोग शिकायत करते हैं कि अमरीका कोई बयान क्यों नहीं देता जबकि अमरीका और बहुत सी पश्चिमी सरकारें इन अपराधों में बराबर की भागीदार हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस बात पर बल देते हुए कि इस्लामी जगत, इस्लामी सरकारों और मुस्लिम देशों को इन अपराधों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए, कहा कि पवित्र क़ुरआन हमसे कहता है कि अनेकेश्वरवादियों और धर्म के दुश्मनों के मुक़ाबले में कठोर और आपस में दयालु रहें किन्तु पवित्र क़ुरआन से दूरी के कारण आज हम इस्लामी जगत में युद्ध और मुसलमानों के बीच मतभेद तथा अनेकेश्वरवादियों के समाने नतमस्त होने के साक्षी हैं। (AK)