आतंकवाद से संघर्ष में ईरान की भूमिका और इस्राईल की चिंता
अमरीका और ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने हमेशा से ही सीरिया में ईरान की उपस्थिति को एक ख़तरे के रूप में याद किया है।
अमरीका और ज़ायोनी अधिकारियों की ओर से यह कोई नई बात नहीं है और जब से सीरिया और इराक़ में संकट आरंभ हुआ है और ईरान ने इन देशों की आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में सहायता की है तभी से यह बात सामने आ रही है।
वास्तव में यदि इस बात पर ध्यान दिया जाए तो पता चलता है कि यह अमरीका और इस्राईल की क्षेत्रीय नीतियों को जारी रखने का एक बहाना है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैक मिस्टर इस्राईल के लिए ईरान के ख़तरे के बारे में कहते हैं कि हमें जिस चीज़ का सामना है वह इस्राईल की सीमाओं के निकट ईरान की उपस्थिति है।
ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामीन नितिनयाहू ने भी हाल ही में फ़्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुल मैंक्रां से मुलाक़ात में कहा था कि इस्राईल ने सीरिया के हवाले से अपनी रणनीति बदल दी है और वहां पर ईरान की गतिविधियों को अपना मुख्य लक्ष्य समझता है।
इसी संबंध में यूरेशलम पोस्ट समाचार पत्र ने रविवार को बिनयामीन नितिनयाहूद के हवाले से लिखा है कि हम सीरिया में ईरान की उपस्थिति को रोकने का प्रयास करेंगे।
यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है कि दमिश्क़ अधिकारियों ने ईरान के विरुद्ध इस्राईल के दावे को हमेशा से रद्द किया है और ईरान ने भी बारंबार कहा है कि वह आतंकवाद से संघर्ष के लिए सीरिया सरकार के निमंत्रण पर दमिश्क़ सरकार को केवल परामर्श सहायता दे रहा है।
क्षेत्र में आतंकवादियों की भीषण पराजय यद्यपि इराक़ और सीरिया की सेना और स्वयं सेवी बलों के प्रयास और ईरान तथा रूस के व्यापक समर्थन से संभव हो सकी है किन्तु क्षेत्र में अशांति की मुख्य जड़ को समाप्त करने में अभी काफ़ी समय लगेगा। (AK)