यूरोप के प्रस्ताव ईरान की मांगों पर पूरे नहीं उतरते
ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था के प्रमुख अली अकबर सालेही ने साफ़ शब्दों में कहा है कि परमाणु समझौते को बाक़ी रख पाने के संबंध में संदेह पैदा हो गया है क्योंकि यूरोपीय संघ की ओर से जो प्रस्ताव सामने आए हैं वह ईरान के लिए संतोषजनक नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गोटेरस से नार्वे में ओस्लो फ़ोरम की बैठक के अवसर पर अपनी मुलाक़ात में सालेही ने कहा कि परमाणु समझौते के बारे में अमरीका की नीति तो विध्वंसकारी है और अमरीका अतीत में भी इसी प्रकार की हरकतें करता रहा है।
अली अकबर सालेही का कहना था कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने के बाद यूरोपीय देशों ने ईरान से मांग की कि वह परमाणु समझौते का पालन करता रहे लेकिन इसके लिए यूरोप ने ईरान के सामने जो प्रस्ताव रखे हैं वह ईरान की मांगों को पूरा नहीं करते।
अली अकबर सालेही ने इस मुलाक़ात में कहा कि मध्यपूर्व के इलाक़े के हालात बहुत ख़तरनाक हैं और ईरान इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है यदि यही परिस्थितियां जारी रहीं तो इसका नुक़सान सबको उठाना पड़ेगा।
अली अकबर सालेही ने कहा कि परमाणु समझौते के बाद आर्थिक और निवेश के क्षेत्रों में ईरान को जो परिणाम मिले वह आशा से बहुत कम हैं अब यूरोपीय संघ तथा संयुक्त राष्ट्र संघ सहित परमाणु समझौते के समर्थकों को चाहिए कि वह इस समझौते का खुलकर उल्लंघन करें और अमरीका की नीतियों के विरोध में आवाज़ उठाएं।
गोटेरस ने कहा कि परमाणु समझौते का बाक़ी रहना विश्व शांति के सदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ परमाणु समझौते का खुला समर्थन करता है और परमाणु समझौते में शेष रह गए देशों से इस संदर्भ में उनकी विस्तार से चर्चा हुई है।