ईरान-उज़्बेकिस्तान का क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक क़दम
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद के सचिव अली शम्ख़ानी ने मंगलवार को तेहरान में उज़्बेकिस्तान के अपने समकक्ष विक्टर महमूदोफ़ से मुलाक़ात में, राजनैतिक, आर्थिक, प्रौद्योगिक, सैन्य, और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने में इस्लामी गणतंत्र ईरान की रूचि पर बल दिया।
क्षेत्र की संयुक्त समस्याओं के रूप में आतंकवाद, चरमपंथ और पृथकतावाद से निपटने के लिए बहुआयामी मुक़बाले, ईरान-उज़्बेकिस्तान के बीच बातचीत का मुख्य विषय था। इस मुलाक़ात में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद के सचिव ने जिस अहम बिन्दु पर बल दिया वह वास्तव में ऐसी मुश्किल है जिसे अमरीका ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष के बहाने अपनी हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों के ज़रिए क्षेत्र में पैदा किया है। शम्ख़ानी ने क्षेत्र में आतंकवाद के संचालन और उसके हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल को अमरीका की रणनीति बतायी।
इस बात में शक नहीं कि आतंकवाद की समस्या को अमरीका और उसके घटकों ने कुछ अतिक्रमणकारी और दुष्ट शासन के सहयोग से क्षेत्र में जन्म दिया और सुरक्षा क़ायम करने के बहाने क्षेत्र से बाहर की फ़ोर्सेज़ की मौजूदगी का नतीजा अशांति व अस्थिरता में विस्तार के सिवा कुछ और नहीं रहा है।
यह प्रक्रिया 11 सितंबर 2001 की घटना के अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के हमले के हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल के साथ शुरु हुयी और इराक़ के अतिग्रहण तथा क्षेत्र में सुरक्षा के प्रौपैगन्डे के माहौल में नेटो के हस्तक्षेप से विस्तृत हुयी लेकिन आज न तो अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा क़ायम है और न ही क्षेत्र से आतंकवाद और चरमपंथ का जड़ से सफ़ाया हुआ।
इन सब बातों के मद्देनज़र ईरान-उज़्बेकिस्तान मध्य एशियाई देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर एक दूसरे के लिए भरोसेमंद साझीदार बन सकते हैं।(MAQ/T)