जेसीपीओए योरोप की ओर से व्यवहारिक क़दम पर निर्भर
वियना में बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के महानिदेशक यूकिया अमानो ने ईरानी राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी से भेंट की जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने बल दिया कि अगर जेसीपीओए से ईरानी राष्ट्र को उसका हक़ नहीं मिला तो फिर हर हाल में नया फ़ैसला लेंगे।
वियना में अमरीका के बिना जेसीपीओए के संयुक्त आयोग की शुक्रवार की बैठक योरोप के लिए इस दृष्टि से निर्णायक है कि वह इस बात को साबित करे कि अमरीका के इस समझौते से निकलने के बाद वह किस हद तक इस समझौते को व्यवहारिक रूप बचाने में गंभीर है। योरोपीय पक्ष 8 मई 2018 को जेसीपीओए से अमरीका के निकलने के बाद से इस समझौते का समर्थन करता आ रहा है और कूटनैतिक बयान में अपने संकल्प को दर्शाया है लेकिन जो कुछ ईरान के लिए अहम है वह योरोप की ओर से व्यवहारिक क़दम है और अब उसके लिए ईरान की ओर से निर्धारित समयावधि ख़त्म होने वाली है। ख़बरों में यह बात सुनने में आ रही है कि शुक्रवार को योरोपीय पक्ष जेसीपीओए को बचाने के लिए ईरान को पैकेज पेश करेगा लेकिन इस पैकेज को इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता द्वारा निर्धारित फ़्रेमवर्क के अनुरूप होना चाहिए यानी योरोप ईरान की ज़रूरत का तेल ख़रीदे, ईरान के साथ बैकिंग संपर्क क़ायम करे और अमरीकी पाबंदियों का साफ़ तौर पर विरोध करे।
हालांकि योरोप की ओर से जेसीपीओए को बचाने के लिए संभावित कोशिश का क्षितिज स्पष्ट नहीं है लेकिन शुक्रवार को वियना में जेसीपीओए के संयुक्त आयोग की बैठक से कुछ हद तक यह मामला स्पष्ट हो जाएगा। अगर स्थिति ईरान के स्वीकार्य योग्य न हुयी तो मौजूदा स्थिति को बदलना ईरान के लिए एकमात्र विकल्प होगा।
अमरीका का मुख्य लक्ष्य ईरान को जेसीपीओए से निकालना है लेकिन ईरान की सैद्धांतिक व तार्किक नीति के नतीजे में गेंद योरोप के पाले में पहुंच गयी है ताकि योरोप स्वतंत्र रूप से यह दर्शाए कि वह किस हद तक वैश्विक कूटनीति की उपलब्धियों की रक्षा के लिए व्यवहारिक क़दम उठा सकता है।(MAQ/T)