ईरान ने ज़ायोनी संसद के क़ानून की निंदा की
इस्लामी गणतंत्र ईरान ने ज़ायोनी संसद के हालिया क़ानून की निंदा की है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने "यहूदी स्टेट" नामक नस्लभेदी बिल के ज़ायोनी संसद में पास होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अवैध अतिग्रहित फ़िलिस्तीन में नस्लभेद, फ़िलिस्तीनी जनता के प्रतिरोध और साहस से समाप्त हो जाएगा।
उनका कहना था कि अवैध और नस्लभेदी ज़ायोनी शासन, फ़िलिस्तीन के असली मालिकों की धरती पर अवैध क़ब्ज़े से अस्तित्व में आया है और ज़ायोनी संसद की हालिया कार्यवाही से इस शासन की नस्लभेदी प्रवृत्ति एक बार फिर स्पष्ट हो गयी है जो पिछले 70 वर्षों से जारी है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमरीका द्वारा ज़ायोनी शासन के व्यापक समर्थन और वाशिंग्टन द्वारा अपने दूतावास को तेल अवीव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने, कुछ अरब देशों का अतिग्रहणकारियों के साथ संबंध सामान्य करने का प्रयास, अंतर्राष्ट्रीय नियमों और क़ानूनों का उल्लंघन करने तथा फ़िलिस्तीनी जनता के दिन प्रतिदिन के जनसंहार के कारण ज़ायोनी शासन को सज़ा न दिए जाने से यह शासन अधिक दुस्साहसी हो गया है।
ज़ायोनी संसद ने व्यापक विरोध के बावजूद 19 जुलाई को "यहूदी स्टेट" नामक नस्लभेदी बिल को पारित कर उसे क़ानून का रूप दे दिया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 62 वोट जबकि विरोध में 55 वोट पड़े जबकि दो सांसदों ने वोटिंग में भाग नहीं लिया।
इस क़ानून के अनुसार, अतिग्रहित फ़िलिस्तीन की सारी भूमि ज़ायोनियों के लिए है और फिलिस्तीनियों को सभी नागरिक व मानवीय अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। इसी तरह हिब्रू ज़बान को आधिकारिक ज़बान घोषित किया गया है। इस क़ानून में बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी घोषित करने के अलावा ज़ायोनी कॉलोनियों के विस्तार को राष्ट्रीय मूल्य कहा गया है और मौजूदा कॉलोनियों को बेहतर करने और नई कॉलोनियों के निर्माण का प्रावधान रखा गया है। (AK)