फ़िलिस्तीन का यहूदीकरण, एक अधूरा सपना हैः वरिष्ठ नेता
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इस्लमाी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने रविवार को होने वाली एक मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन और बैतुल मुक़द्दस के बारे में अमरीका और ज़ायोनी के डील आफ़ द सेंचुरी नामक अशुभ योजना की ओर संकेत करते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन के यहूदीकरण की योजना एक बिखरा हुआ सपना है जिसे इन लोगों ने देखा है, न तो यह सपना पूरा होगा और न ही यह योजना पूरी होगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २३, २०१८ १५:५४ Asia/Kolkata
  • फ़िलिस्तीन का यहूदीकरण, एक अधूरा सपना हैः वरिष्ठ नेता

इस्लमाी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने रविवार को होने वाली एक मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन और बैतुल मुक़द्दस के बारे में अमरीका और ज़ायोनी के डील आफ़ द सेंचुरी नामक अशुभ योजना की ओर संकेत करते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन के यहूदीकरण की योजना एक बिखरा हुआ सपना है जिसे इन लोगों ने देखा है, न तो यह सपना पूरा होगा और न ही यह योजना पूरी होगी।

ज़ायोनी संसद में इस्राईल की संसद में 19 जुलाई को "यहूदी देश" नामक बिल पर मतदान हुआ और यह बिल पास होकर क़ानून बन गया। इस बिल के समर्थन में 62 और विरोध में 55 मत पड़े जबकि 2 सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। इस क़ानून के अनुसार, फ़िलिस्तीन की भूमि यहूदियों का ऐतिहासिक वतन समझी जाएगी।

इस क़ानून के अनुसार, अतिग्रहित फ़िलिस्तीन की सारी भूमि ज़ायोनियों के लिए है और फिलिस्तीनियों को सभी नागरिक व मानवीय अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। इसी तरह हिब्रू ज़बान को आधिकारिक ज़बान घोषित किया गया है। इस क़ानून में बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी घोषित करने के अलावा ज़ायोनी कॉलोनियों के विस्तार को राष्ट्रीय मूल्य कहा गया है और मौजूदा कॉलोनियों को बेहतर करने और नई कॉलोनियों के निर्माण का प्रावधान रखा गया है।

डील आफ़ सेंचुरी के बारे में अभी कोई औपचारिक घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन इसके संबंध में जानकारियां लीक होकर आ रही हैं। इन जानकारियों से पता चलता है कि इस डील में मिस्र और जार्डन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

बताया जाता है कि इस डील के तहत ग़ज़्ज़ा पट्टी के इलाक़े को पश्चिमी तट के इलाक़े से पूरी तरह अलग कर दिया जाएगा। ग़ज़्ज़ा वासियों के लिए पीने के पानी, बिजली, अन्य देशों की यात्रा की सुवधा, बंदरगाह और एयरपोर्ट का बंदोबस्त किया जाएगा।

वैसे डील आफ़ द सेंचुरी के बारे में यह बातें भी कही जाने लगी हैं कि इस योजना का फ़िलिस्तीन की ज़मीनी सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। बहरहाल अमरीका ने फ़िलिस्तीन के हवाले से बहुत ख़तरनाक खेल शुरु किया है जिसका समय पर ही जवाब दिया जाना बहुत ज़रूरी है। (AK)