ईरान का तर्क, वार्ता और सहयोग हैः विदेशमंत्रालय
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि ईरान का तर्क, वार्ता और सहयोग का तर्क है जिसके लिए परस्पर सम्मान और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने बिना पूर्व शर्त ईरान से वार्ता के लिए वाशिंग्टन की तैयारी पर आधारित अमरीकी राष्ट्रपति के नये बयान के बारे में कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने लहजे को बदलते हुए ईरानी जनता को धमकी देने के बजाए वार्ता का फ़ैसला किया है, यह बेकार की बयानबाज़ी से उनके पछतावे का पता चलता है, यद्यपि ट्रम्प के बयान के तुरंत बाद इस देश के विदेशमंत्री का बयान भी सामने आया जिससे पता चल गया कि वाशिंग्टन विदेश नीति में असमंजस का शिकार है।
श्री बहराम क़ासिमी ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान से वार्ता का सुझाव एेसी स्थिति में पेश किया गया है कि अमरीकी सरकार बिना किसी औचित्य के और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए परमाणु समझौते से निकल गयी और अपने अन्यायपूर्ण प्रतिबंध ईरानी जनता पर फिर से थोप दिया।
उनका कहना था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपने व्यवहार से यह सिद्ध कर दिया कि वह वार्ता और तर्क का साथी है और जो प्रतिबद्धता स्वीकार करता है उस पर प्रतिबद्ध रहता है।
याद रहे अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण बयानबाज़ियों के बाद सोमवार को वाइट हाउस में इटली के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह बिना किसी शर्त के ईरानी नेताओं के साथ वार्ता पर तैयार हैं।
दूसरी ओर ईरान ने मानवाधिकार के बारे में अमरीकी विदेशमंत्री के बयान का खंडन कर दिया है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने कहा कि अमरीकी स्वयं मानवाधिकारों के हनन में सबसे आगे है, इसलिए उसको दूसरे देशों के बारे में मानवाधिकार के बारे में कुछ कहने का हक़ नहीं है।
उल्लेखनीय है कि वाशिंग्टन में 24 से 26 जुलाई तक धार्मिक स्वतंत्र शीर्षक के अंतर्गत अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन और कुछ देशों के विदेशमंत्रियों का सेमिनार आयोजित हुआ।
इस सेमिनार में ईरान में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमरीका में होने वाले इस सेमीनार में ज़ायोनी शासन और कुछ उन देशों के विदेशमंत्रियों ने भाग लिया जो स्वयं मानवाधिकार के हनन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि इन विदेशमंत्रियों के सेमीनार का घोषणापत्र ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है जो ग़लत, निराधार और अवास्तविक सूचनाओं के आधार पर जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि ईरान का इतिहास इस बात का साक्षी है कि यहां हमेशा विभिन्न धर्मों के मानने वाले एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करते रहे हैं और इस समय भी ईरान में सभी धर्मों के अनुयायियों को समान नागरिक अधिकार प्राप्त हैं।
ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ईरान में धार्मिक दृष्टि से सभी अल्पसंख्यकों को संसद और सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और जातीय असहिष्णुता और हिंसा पश्चिमी एशिया और पश्चिमी देशों से आया है और मानवीय त्रासदी का कारण बना है। (MAQ/N)