आसेआन के साथ मित्रता समझौते पर हस्ताक्षर, ईरान की बड़ी सफलता
इस्लामी गणतंत्र ईरान ने आसेआन के साथ मैत्री समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। ईरान के विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने गुरुवार को सिंगापुर में इस समझौते पर हस्ताक्षर किये।
आसेआन का मैत्री समझौता सन 1976 में इस संगठन के संस्थापक देशों अर्थात, सिंगापुर, इंडोनेशिया, मलेशिया , थाईलैंड और फिलीपीन की पहल से अस्तित्व में आया है। इस समझौते का आधार, शांति, सहिष्णुता, अन्य देशों की प्रभुसत्ता के सम्मान और वर्चस्व के खिलाफ सहयोग पर आधारित है। आसेआन के इस समय दस सदस्य हैं जबकि उसके मैत्री समझौते के 36 सदस्य हैं जो आसेआन के साथ एक प्रभवशाली ब्लाक में बदल चुके हैं। इस समझौते में ईरान की सदस्यता, राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दृष्टि से यह समझौता बेहद अहम है। एेसे हालात में कि जब अमरीका जेसीपीओए से निकल कर ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करने की कोशिश कर रहा है, आसेआन के मैत्री समझौते में ईरान की सदस्य से ईरान का महत्व उजागर हुआ है। इस से एक बार फिर यह साबित हो गया कि ईरान, अमरीका के जेसीपीओए से निकल जाने के बावजूद , उस पर हस्ताक्षर से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा। सिंगापुर में ईरान के राजदूत जवाद अन्सारी ने कहा कि टीएसी समझौते से ईरान के जुड़ने से यह साबित हो गया कि ईरानोफोबिया की नीति विफल हो चुकी है।
इस समझौते से जुड़ना ईरान के लिए आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिणपूर्वी एशिया , संभावनाओं से भरा क्षेत्र है और मैत्री व सहयोग के समझौते से ईरान के जुड़ जाने से इन संभावनाओं से अधिक बेहतर रूप में लाभ उठाने का अवसर प्राप्त होगा। (Q.A.)