शक्तिशाली आसियान संघ जेसीपीओए का समर्थक
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने गुरुवार को सिंगापूर में इस देश के विदेश मंत्री, प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति तथा इस देश में आसियान संघ की बैठक में भाग लेने वाले कुछ देशों के विदेश मंत्रियों के साथ सघन बातचीत की।
दक्षिण-पूर्वी एशिया में ज़रीफ़ की कूटनीति परमाणु समझौते जेसीपीओए और इस अंतर्राष्ट्रीय समझौते से अमरीका के निकलने के बावजूद इसे सुरक्षित रखने पर केन्द्रित थी। ज़रीफ़ के साथ मुलाक़ात में विभिन्न देशों के अधिकारियों की ओर से जेसीपीओए का समर्थन यह दर्शाता है कि दुनिया उस तरह अमरीकी नीतियों के इर्दगिर्द नहीं घूम रही है जिस तरह अमरीकी सत्ताधारी वर्ग सोचता है।
दक्षिण-पूर्वी एशिया में दुनिया का आर्थिक दृष्टि से पांचवां सबसे बड़ा संघ आसियान एक स्वतंत्र खिलाड़ी है और वह अमरीकी प्रतिबंधों के दौर में भी ईरान सहित दूसरे देशों के साथ अपने आर्थिक संबंध को प्रतिरोध व नई पद्धति के ज़रिए मज़बूत करना चाहता है। यह व्यवहार, अमरीका की परमाणु समझौते जेसीपीओए को पूरी तरह एकपक्षीय रूप से तबाह करने की नीति की हार है। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने जेसीपीओए के संबंध में अपने वचन को व्यवहारिक रूप से पूरा कर विश्व शांति के लिए सद्भावना के साथ अपनी कोशिश को साबित कर दिया जिससे विश्व समुदाय ईरान पर भरोसा करता है और यह भरोसा ही द्विपक्षीय व बहुपक्षीय संबंधों को सुरक्षित रखने में सबसे अहम तत्व समझा जाता है। इसी व्यवहार ने अमरीका की ईरान के तेल के निर्यात को शून्य तक पहुंचाने की नीति को व्यवहारिक होने से रोक दिया है। भारत का अमरीका के सामने डट जाना और नई दिल्ली की इस बात पर ताकीद की वह ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की एकपक्षीय पाबंदियों का समर्थन नहीं करता, भारत की स्वाधीनता को व्यवहार में दर्शा दिया है।
सिंगापूर में ज़रीफ़ के साथ बातचीत में विभिन्न देशों के अधिकारियों का जेसीपीओए के संबंध में अमरीकी नीतियों से ख़ुद को स्वाधीन दिखाना, दुनिया में कूटनीति की अहमियत को दर्शाता है और जेसीपीओए दुनिया में सफल कूटनीति का नमूना है।
जेसीपीओए के प्रति विश्व स्तर पर समर्थन से कि जिसकी ताज़ा मिसाल आसियान की बैठक है, एक बार फिर अमरीका अलग थलग पड़ गया और इस समर्थन ने यह दर्शा दिया कि पारस्परिक रूप से एक दूसरे के निकट होने वाली इस दुनिया में हुक्म देने पर आधारित नीति का कोई स्थान नहीं है।(MAQ/T)