ईरान और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के विरुद्ध अमरीकी कार्यवाहियां
महीनों की धमकियों के बाद अंततः अमरीकी सरकार ने ईरान के विरुद्ध परमाणु प्रतिबंधों को फिर से लगा दिया है।
मंगलवार, सात अगस्त, सुबह से ही ईरान के विरुद्ध कुछ प्रतिबंध जो वर्ष 2015 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से हटा लिए गये थे, दोबारा लागू कर दिए गये।
डाॅलर से लेनदेन पर प्रतिबंध, सोना के व्यापार पर प्रतिबंध, वाहन निर्माण उद्योग में पूंजीनिवेश पर प्रतिबंध, स्टील के लेनदेन पर प्रतिबंध, यात्री विमान और उसके कलपुर्ज़ों की बिक्री पर प्रतिबंध, यह वह प्रतिबंध हैं जो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के आदेश से दोबारा लौटा दिए गये। नवम्बर के महीने में ईरान के विरुद्ध दूसरे चरण के प्रतिबंध लगाए जाएंगे जिनमें तेल और बैंकिंग विभाग शामिल होंगे।
ईरान और गुट पांच धन के एक बीच होने वाले समझौते से एक पक्षीय रूप से अमरीका ने निकलकर न केवल अंतर्राष्ट्रीय समझौते का मखौल उड़ाया बल्कि उसने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 का भी हनन किया। यह प्रस्ताव जुलाई 2015 को पारित हुआ था। इस प्रस्ताव में अमरीकी सरकार ने स्पष्ट रूप से यह वचन दिया था कि जब तक ईरान परमाणु समझौते पर प्रतिबद्ध रहेगा तब तक ईरान पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे।
इस्लामी गणतंत्र ईरान ने भी दुनिया के परमाणु कार्यक्रम पर नज़र रखने वाली सर्वोच्च संस्था के रूप में आईएईए की 12 रिपोर्टों की गवाही के आधार पर अपने वचनों पर अमल किया है। (AK)