अतिक्रमणकारी यमनी जनता की हत्या के ज़िम्मेदार हैंः ईरान
26 मार्च वर्ष 2015 से सऊदी अरब ने अमेरिका और संयुक्त अरब इमारात सहित कुछ देशों के समर्थन से यमन पर हमला किया है
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने सऊदी अरब के जद्दा नगर में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी की होने वाली बैठक में जारी होने वाली विज्ञप्ति के 11वें अनुच्छेद को रद्द करते हुए कहा कि यमन पर अतिक्रमण करने वाले देशों ने अपने अपराधों पर पर्दा डालने के मूल्यहीन विज्ञप्ति जारी की है और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठनों व संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासेमी ने स्पष्ट किया कि यमन पर हमला करने वाले कई वर्षों के मानवीय संकट, आधुनिकतम हथियारों से निहत्थे यमनी लोगों की हत्या और यमन की मूलभूल संरचाओं की तबाही के ज़िम्मेदार हैं।
ओआईसी की एक पक्षीय बैठक बुधवार को सऊदी अरब के जद्दा नगर में हुई। इस बैठक का लक्ष्य लाल सागर में यमन के अंसारुल्लाह द्वारा सऊदी अरब के तेल के दो जहाज़ों को लक्ष्य बनाये जाने के मामले की समीक्षा था। इस बैठक में ईरान पर भी आरोप लगाया गया जबकि यमनी बलों का दावा है कि उन्होंने सऊदी अरब के युद्धक जलपोतों को निशाना बनाया है।
26 मार्च वर्ष 2015 से सऊदी अरब ने अमेरिका और संयुक्त अरब इमारात सहित कुछ देशों के समर्थन से यमन पर हमला किया है और इस हमले के आरंभ से ईरान पर आरोप लगाये जाते- रहे हैं।
सऊदी अरब ने ग़लत समीकरणों के आधार पर सोचा था कि वह एक महीने से कम की अवधि में इस युद्ध को जीत लेगा परंतु इस युद्ध को आरंभ हुए चौथा साल चल रहा है और अब वर्तमान स्थिति से बाहर निकलने के लिए सऊदी अरब के पास आम जनमत का ध्यान भटकाने और दूसरों पर निराधार आरोप मढ़ने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं है।
यमन के खिलाफ सऊदी अरब ने जो युद्ध आरंभ किया था अब उसका समीकरण बदल चुका है और यमनी सेना की दिन- प्रतिदिन बढ़ती शक्ति ने अतिक्रमणकारियों को चिंतित कर दिया है।
यमनी सैनिकों द्वारा सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के भीतर मिसाइल और ड्रोन हमलों और इसी प्रकार लाल सागर में तेल ले जा रहे सऊदी अरब के दो जहाज़ों को लक्ष्य बनाये जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
बहरहाल इस समय समूचे विश्व वासियों के लिए यह सिद्ध हो गया है कि सऊदी गठबंधन और उसके पश्चिमी समर्थक यमन में अंजाम दिये जा रहे अपराधों में सीधी भूमिका निभा रहे हैं और शरणार्थियों के मामले में संयुक्त राष्ट्र के उच्चायोग ने भी यमन संकट को विश्व के बदतरीन मानवीय संकट की संज्ञा दी और घोषणा की है कि यमन संकट ने दो करोड़ 22 लाख यमनवासियों को मानवता प्रेमी सहायताओं का मोहताज बना दिया है और दसियों लाख लोगों का जीवन ख़तरे में है। MM