ईरान के विरुद्ध अमरीका का व्यवहार अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्धः क़ासेमी
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमरीका की ओर से "ईरान एक्शन ग्रुप" के गठन को अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध बताया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २०, २०१८ ११:१४ Asia/Kolkata
  • ईरान के विरुद्ध अमरीका का व्यवहार अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्धः क़ासेमी

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमरीका की ओर से "ईरान एक्शन ग्रुप" के गठन को अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध बताया है।

बहराम क़ासेमी ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में अमरीकी विदेश मंत्रालय में "ईरान एक्शन ग्रुप" के गठन के संबन्ध में कहा कि अमरीकी व्यवहार और उसकी कार्यवाहियां, समस्त अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध हैं।  उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यवाहियों का कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यूरोपियों की ओर से आर्थिक पैकेज पेश करने और ईरान के भीतर यूरोपीय कंपनियों की उपस्थिति के बारे में कहा कि अमरीका की ओर से एकपक्षीय रूप में जेसीपीओए से निकलने के बाद यूरोपीय संघ तथा रूस और चीन के बारे में ईरान की नीति बहुत साफ है।

उन्होंने जारी प्रक्रिया से संतुष्ट न होने का उल्लेख करते हुए बल देकर कहा कि यूरोपीय देशों को चाहिए कि वे इस बारे में अधिक गंभीरता और गति के साथ प्रयास करें।

बहराम क़ासेमी ने जर्मनी की चांस्लर की ओर से परमाणु समझौते को बाक़ी रखने के प्रति झुकाव के साथ ही ईरान के मिसाइल कार्यक्रम के प्रति चिंता व्यक्त करने पर आधारित एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जर्मनी चांस्लर ने इस बारे में अपना दृष्टिकोण बयान किया है जबकि परमाणु समझौते की वार्ता के दौरान वार्ता करने वाले देश यह जानते हैं कि मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु समझौता दो अलग-अलग विषय हैं।

उन्होंने कहा कि जर्मन की चांसलर और उनके सलाहकारों को यह बात समझ लेनी चाहिए कि परमाणु समझौता या जेसीपीओए और ईरान का मिसाइल कार्यक्रम दो अलग विषय हैं और इनका एक-दूसरे से कोई संबन्ध नहीं है।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर वार्ता की गुंजाइश नहीं है।

बहराम क़ासेमी ने विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ के उस बयान के संदर्भ में जिसमें उन्होंने बताया था कि यूरोपीय, हर्जाना देने के लिए अभी तैयार नहीं हैं एेसे में ईरान कबतक प्रतीक्षा करे, कहा कि तेहरान को इस बात की अपेक्षा थी कि यूरोपीय अपने प्रस्तावों का उल्लेख शीघ्र ही करेंगे।  हालांकि एेसा लगता है कि आर्थिक जटिल कार्यवाहियों और अमरीकी दबाव के कारण उनके फैसले की गति कमज़ोर पड़ी है।