आईएईए की वियना बैठक, जेसीपीओए का समर्थन, अमरीका एकातंवास में!
परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी द्वारा ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते के समर्थन से एक बार फिर यह सिद्ध हो गया कि इस्राईल, सऊदी अरब और अमरीका, ईरान के खिलाफ अपने निराधारा दावों के बावजूद विश्व समुदाय के मुक़ाबले में अलग- थलग हैं।
वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के 62वें वार्षिक सम्मेलन में अधिकांश सदस्य देशों ने आईएईए के साथ ईरान के सहयोग का स्वागत करते हुए परमाणु समझौते के बचाए रखने की इच्छा प्रकट की और जेसीपीओए से अमरीका के एक तरफा रूप से निकल जाने को खेदजनक बताया। अमरीका, इस्राईल, और सऊदी अरब ने इस सम्मेलन के दौरान एक बार फिर ईरान के परमाणु समझौते का विरोध किया लेकिन उनका कड़ा उत्तर देते हुए ईरान के प्रतिनिधि काज़िम ग़रीब आबादी ने कहा कि अमरीका की मनमानी, इस देश के भरोसे के लायक़ न होने का सुबूत है और अमरीकी मनमानियों के सामने विश्व समुदाय का डट जाना बेहद ज़रूरी है। वियना सम्मेलन में ईरान के परमाणु समझौते का व्यापक समर्थन इस बात का सुबूत है कि अब दुनिया में अमरीका की मनमानी का युग बीत चुका है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जिस तरह से ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते तथा अन्य कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से बाहर निकले हैं उससे विश्व समुदाय की समझ में यह बात आ गयी कि उनके इन क़दमों के सामने चुप रहने का परिणाम बहुत भयानक हो सकता है और यही वजह है कि ट्रम्प की नीतियों का विरोध इतना बढ़ा कि वह स्वंय अमरीका की सीमा के भीतर भी फैलता नज़र आ रहा है और स्वंय अमरीका और खुद उनकी अपनी पार्टी में विरोधियों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
जेसीपीओए के संदर्भ में ट्रम्प की नीतियों का अंतरराष्ट्रीय विरोध यह दर्शाता है कि ट्रम्प और उनके घटक, अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो पाए और विभिन्न संगठनों और मंचों पर उनका थलग- थलग पड़ना, जेसीपीओए से निकलने की वजह से अधिक स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है जबकि अमरीका और उसकी मंडली, ईरान को विश्व स्तर पर अलग थलग करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाए हुए है।(Q.A.)