अमरीकी प्रतिबंध हैं वाशिग्टन सरकार के नैतिक एवं राजनीतिक पतन के सूचक
विदेश मंत्रालय ने एलान किया है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, मित्र देशों के साथ सहयोग तथा आंतरिक संसाधनों पर भरोसा करते हुए अमरीका के ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने में पूरी तरह से सक्षम है।
विदेश मंत्रालय के बयान में आया है कि हालांकि पिछले प्रतिबंध की तुलना में अमरीका के नए प्रतिबंध का नकारात्मक प्रभाव ईरान की अर्थव्यवस्था पर थोड़ा-बहुत पड़ सकता है किंतु यह अमरीकी सरकार के लिए नैतिक तथा राजनैतिक महापतन है।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ईरान के विरुद्ध प्रतिबंध वास्तव में परमाणु समझौते एवं सुरक्षा परिषद के समझौतों का उल्लंघन, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के आदेश की अवेहलना तथा नैतिक एवं क़ानूनी नियमों के प्रति उदासनीता के अर्थ में है। बयान में यह भी कहा गया है कि ईरान पर प्रतिबंधों ने पुनः विश्व समुदाय और अमरीका के घटक देशों के लिए यह सिद्ध कर दिया है कि अमरीकी सरकार न केवल यह कि अन्तर्राष्ट्रीय नियमों को कोई महत्व नहीं देती बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय निमयों के प्रति कटिबद्ध रहने वाले देशों को दंडित करना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि 4 नवंबर 2018 से ईरान के विरुद्ध अमरीका के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू होने जा रहे हैं जो बैंकिंग सिस्टम, वित्तीय लेनदेन और तेल के निर्यात को प्रभावित करेंगे। इसी बीच जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रांस के विदेशमंत्रियों ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी के साथ एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा है कि वे प्रतिबंधों के दौरान ईरान के साथ बैंकिंग एवं व्यापारिक संबन्ध जारी रखेंगे।