परमाणु समझौता एक अच्छा समझौता है, ज़रीफ़
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ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने परमाणु समझौते को एक अच्छा समझौता बताते हुए कहा है कि अमरीका की कोशिशों के बावजूद तेहरान अब वाशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता नहीं करेगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २३, २०१८ १४:०९ Asia/Kolkata
  • परमाणु समझौता एक अच्छा समझौता है, ज़रीफ़

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने परमाणु समझौते को एक अच्छा समझौता बताते हुए कहा है कि अमरीका की कोशिशों के बावजूद तेहरान अब वाशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता नहीं करेगा।

गुरुवार को इटली की राजधानी रोम में मेडिटेरेनियन वार्ता सम्मेलन में ज़रीफ़ ने उल्लेख किया कि दुनिया में हमारी पहचान सहयोग और बातचीत करने वालों के रूप में है, लेकिन बात अगर ईरान की स्वाधीनता की होगी तो हम देश की स्वाधीनता के लिए डट जायेंगे।

ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि ईरान किसी भी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने पूछा कि ईरान क्यों अपनी क्षेत्रीय नीतियों में बदलाव लाए? क्या ईरान ने सद्दाम का समर्थन किया था? क्या ईरान ने दाइश, नुस्रा फ़्रंट और तालिबान का समर्थन किया था। क्या ईरान ने नाइन इलेवन के हमलों को अंजाम दिया था। क्या ईरान ने क़तर की घेराबंदी की। क्या ईरान ने यमनी जनता के सिरों पर बम बरसाए? इन समस्त वास्तविकताओं के मद्देनज़र दूसरों को अपनी नीतियों में परिवर्तन लाना चाहिए।

12 साल की सघन बातचीत के बात ईरान और विश्व की 6 शक्तियों के बीच 2015 में परमाणु समझौता हुआ था। लेकिन अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद, वाशिंगटन ने इसी साल 8 मई को परमाणु समझौते से बाहर निकलने का एलान कर दिया।

इसके बावजूद, ईरान परमाणु समझौते में बना हुआ है, दूसरी ओर यूरोप समेत समझौते के अन्य पक्षों ने भी इसमें बने रहने पर बल दिया है। इससे अमरीका विश्व में अलग थलग पड़ गया है। इसके अलावा, ट्रम्प की एकपक्षीय नीतियों ने भी अमरीका को विश्व में अलग थलग कर दिया है। अमरीका के दोस्त समझे जाने वाले यूरोपीय अधिकारी ट्रम्प के अमरीका फ़र्स्ट नारे की निंदा कर रहे हैं।

इस संदर्भ में राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ हुसैन मूसवियान का कहना है कि क्षेत्र और विश्व में अमरीका की ताक़त कमज़ोर पड़ रही है। ट्रम्प प्रशासन एकपक्षीय नीतियों को अपनाकर अमरीका फिर से मज़बूत बनाने के लिए हाथ पैर मार रहा है, लेकिन उसकी ग़लत नीतियों के कारण अमरीका के कमज़ोर पड़ने की प्रक्रिया और तेज़ हो गई है।

ऐसी परिस्थितियों में क्षेत्र में ईरान की नीतियों में परिवर्तन की अमरीका की मांग एक बचकाना हरकत से ज़्यादा कुछ नहीं है।