बहुत जल्द शुरू हो जाएगा नया वित्तीय तंत्र एसपीवी
ईरान के परमाणु समझौते से अमरीका गत मई महीने में बाहर निकल गया लेकिन इस समझौते में शामिल अन्य देशों यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से कहा गया कि वह समझौते का पालन करते रहेंगे।
सभी पक्षों का यह कहना था कि परमाणु समझौता एक बड़ी कूटनैतिक और राजनैतिक उपलब्धि है जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।
अमरीका ने परमाणु समझौते से बाहर निकल कर यह घोषणा कर दी कि वह ईरान पर प्रतिबंध लगा रहा है और जो देश भी ईरान से व्यापार करेगा उस पर भी प्रतिबंध लगाएगा इस बीच यूरोप ने अमरीका के आर्थिक प्रतिबंधों का तोड़ निकालने के लिए एसपीवी के नाम से नया वित्तीय नेटवार्क बनाने की घोषणा की। अमरीका ने गत 5 नवंबर से ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों की घोषणा कर दी मगर अब तक यूरोप ने एसपीवी नेटवर्क को लागू नहीं किया जिस पर ईरान ईरान ने चेतावनी दी।
सोमवार को यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रिका मोग्रीनी ने कहा कि बहुत जल्द एसपीवी वित्तीय सिस्टम काम करना शुरू कर देगा। मोग्रीनी ने कहा कि मुझे आशा है कि आने वाले हफ़्तों में और यह साल पूरा होने से पहले ही यह सिस्टम काम करना शुरू कर देगा और इस सिस्टम को ईरान के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग किया जाएगा। यह वित्तीय सिस्टम ईरान और यूरोपीय संघ के बीच आयात निर्यात में वित्तीय सुविधाएं देने के लिए प्रयोग किया जाएगा। यह सिस्टम ग़ैर यूरोपीय देश भी ईरान से व्यापार करने के लिए प्रयोग कर सकेंगे।
ब्रसेल्ज़म में यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस बात पर सहमति नज़र आई कि ईरान के साथ किया गया परमाणु समझौता महत्वपूर्ण है और इसे जारी रखा जाना ज़रूरी है। यही कारण है कि यूरोप ने अमरीका की ओर से ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की घोषणा के बावजूद बार बार कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौता जारी रहेगा और ईरान तथा यूरोपय के बीच व्यापार भी होता रहेगा।
टीकाकार यह मानते हैं कि ईरान का परमाणु समझौता ही नहीं बल्कि दूसरे कई मुद्दों पर भी यूरोपीय संघ अमरीका से अलग हटकर अपनी नीति तय कर रहा है। यूरोपीय संघ को यह महसूस होने लगा है कि अमरीकी राष्ट्रपति के वर्तमान रवैए को देखते हुए यह लगता है कि अमरीका के साथ यूरोप का पारम्परिक सहयोग अब आगे जारी नहीं रह पाएगा। अतः यूरोप अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमरीका से स्वतंत्र होकर अपनी अलग साख बनाने की कोशिश में है। नया वित्तीय सिस्टम भी यूरोप की इसी कोशिश का नतीजा है।