अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए ईरान की तालेबान के साथ शांति वार्ता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि योरोप के व्यवहार से पता चलता है कि वह अमरीका के दबाव के सामने असहाय है।
बहराम क़ासेमी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, अमरीका के परमाणु समझौते जेसीपीओए से निकलने के बाद योरोप के इस समझौते को बाक़ी रखने के लिए निर्धारित अवधि दो महीने गुज़रने के बाद भी विशेष वित्तीय तंत्र एसपीवी के गठन के लिए कोई ख़ास प्रयास न होने का उल्लेख किया और कहा कि इस तंत्र की अपनी जटिलता और योरोपीय देशों पर अमरीका की ओर से बहुत अधिक दबाव की वजह से बातचीत लंबी हो गयी है।
उन्होंने कहा कि जेसीपीओए को बचाने के लिए योरोप का राजनैतिक संकल्प अहम बात थी लेकिन उसके व्यवहार से लगता है कि वह अमरीकी दबाव के सामने कुछ नहीं कर पा रहा है, इसी वजह से योरोप निर्धारित समयावधि में अपने वचन को पूरा नहीं कर सका।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विदेश सचिव से तालेबान के प्रतिनिधिमंडल की तेहरान में बातचीत की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अली शमख़ानी के पिछले हफ़्ते काबुल दौरे और अफ़ग़ानिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी मुलाक़ात के बाद, रविवार को तालेबान का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान आया और उसने विदेश सचिव सय्यद अब्बास इराक़ची से बातचीत की।
बहराम क़ासेमी ने इस समय अफ़ग़ानिस्तान की आधी ज़मीन पर तालेबान के नियंत्रण होने की ओर इशारा करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अशांति, अस्थिरता और मुश्किलों के मद्देनज़र तालेबान ने ईरान के साथ बातचीत में रूचि दिखायी और यह बातचीत अफ़ग़ान सरकार को सूचित करने के बाद हुयी है।
उन्होंने तालेबान के साथ बातचीत का लक्ष्य अफ़ग़ान गुटों और इस देश की सरकार के बीच बातचीत की प्रक्रिया को सहल करने और किसी तरह का उपाय निकालने में मदद करना बताया ताकि अफ़ग़ानिस्तान में शांति क़ायम हो सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीरिया संकट के हल से संबंधित आस्ताना वार्ता प्रक्रिया बारे में ईरान, रूस और तुर्की के बीच जारी सहयोग और इस वार्ता की गैरंटी देने वाले राष्ट्राध्यक्षों की बातों के भावी आदेश के बारे में पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि इस संकट के हल के लिए बड़े क़दम उठाए गए हैं और यह वार्ता प्रक्रिया सीरिया की संविधान समिति के गठन सहित अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक जारी रहेगी।
उन्होंने इराक़ से ईरान के सैन्य सलाहकारों के निकलने के बारे में कहा कि ईरान के सैन्य सलाहकारों की मौजूदगी इराक़ सरकार के निवेदन पर वहां आतंकवादी गुटों से संघर्ष मौजूद के लिए थी जो इराक़ में दाइश के अतिग्रहण से सारे इलाक़े आज़ाद होने के बाद ख़त्म हो गयी।(MAQ/N)