ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमरीका की चिंता निराधार है
अंतरिक्ष समेत प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की प्रगति पर एक बार फिर अमरीकी अधिकारियों ने चिंता जताई है।
गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ईरान के मिसाइल एवं स्पेस कार्यक्रमों की प्रगति पर चिंता जताते हुए तेहरान से मांग की है कि वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को बंद कर दे। पोम्पियो ने यह दावा भी किया है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2231 प्रस्ताव का उल्लंघन है।
इसी प्रकार अमरीकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने दावा किया कि ईरान के स्पेस कार्यक्रम में जिस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है वह वही है जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में प्रयोग किया जाता है।
अमरीकी अधिकारियों की इस प्रकार की प्रतिक्रियाएं कोई नई बात नहीं है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमरीका का वर्तमान प्रशासन ख़ुलकर ईरान विरोधी नीतियों पर अमल कर रहा है। ट्रम्प प्रशासन ईरान की दुश्मनी की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से बाहर निकल गया और अब विभिन्न बहानों से ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को निशाना बना रहा है, ताकि यह साबित कर सके कि यह कार्यक्रम दुनिया की सुरक्षा के लिए ख़तरा है।
अमरीका के इस व्यवहार का मूल कारण ईरानी राष्ट्र से उसकी पुरानी दुश्मनी है। अमरीका ने ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से पिछले 40 वर्षों के दौरान विभिन्न बहानों से ईरानी राष्ट्र को निशाना बनाया है। अब अमरीका एकपक्षीय कड़े प्रतिबंध लगाकर ईरानी राष्ट्र को झुकाने का असफल प्रयास कर रहा है।
जहां तक अमरीकी अधिकारी सुरक्षा परिषद के 2231 प्रस्ताव की बात कर रहे हैं, यह प्रस्ताव ईरान को मिसाइलों के परीक्षण से नहीं रोकता है। इस संदर्भ में ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ा का कहना है कि सेटेलाइट कैरियर को लॉंच करना या मिसाइल परीक्षण करना सुरक्षा परिषद के 2231 प्रस्ताव का उल्लंघन नहीं है। बल्कि अमरीका ने परमाणु समझौते से बाहर निकलकर ख़ुद इस प्रस्ताव का उल्लंघन किया है।
ईरान की मिसाइल शक्ति केवल रक्षात्मक है और किसी भी देश के लिए इससे कोई ख़तरा नहीं है। अपनी रक्षा शक्ति को मज़बूत बनाना हर देश का अधिकार है। इसलिए अमरीका के आरोप और दबाव ईरान को अपने इस अधिकार की प्राप्ति से नहीं रोक सकते।